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टॉफ़ी का इंद्रधनुष: रंग आपस में मिलते क्यों नहीं?

2026-10-23 · YouTube पर देखें

सारांश

बची हुई रंग-बिरंगी टॉफ़ियाँ, एक सफ़ेद प्लेट और थोड़ा-सा गुनगुना पानी, और देखते ही देखते बन जाता है एक गोल इंद्रधनुष! इस वीडियो में हम जासूस बनकर सुराग जोड़ते हैं और समझते हैं कि चीनी कैसे घुलती है, रंग कैसे फैलते हैं, और धारियाँ आपस में क्यों नहीं मिलतीं।

पूरा पाठ

0:00रंगीन रहस्य

क्या आपने कभी इंद्रधनुष बनते देखा है? एक सफ़ेद प्लेट पर? वो भी एक मिनट से कम में! न ब्रश चाहिए, न पेंट। बस कुछ बची हुई रंग-बिरंगी टॉफ़ियाँ। और थोड़ा-सा गुनगुना पानी। पानी डालो... और रंगों की धारियाँ बीच की ओर दौड़ पड़ती हैं! जैसे कोई रेस शुरू हो गई हो! पर यहाँ एक पहेली है। लाल धारी, पीली धारी के ठीक बगल में चलती है। फिर भी दोनों आपस में मिलती नहीं। आख़िर क्यों? चलो, जासूस बनकर ये रहस्य सुलझाते हैं। पर पहले देखते हैं, ये जादू बनता कैसे है!

0:47प्रयोग की तैयारी

तो, आपको क्या चाहिए? एक सफ़ेद प्लेट। अलग-अलग रंगों की टॉफ़ियाँ, जिन पर चीनी की परत हो। और थोड़ा-सा गुनगुना पानी, किसी बड़े की मदद से। ध्यान रखना, गरम नहीं! बस हल्का गुनगुना। पहला कदम। टॉफ़ियों को प्लेट के किनारे-किनारे, गोल घेरे में सजाओ। दूसरा कदम। रंग बारी-बारी से रखो। लाल, नारंगी, पीला, हरा, बैंगनी। तीसरा कदम। बीच में धीरे से पानी डालो। बस इतना, कि टॉफ़ियाँ थोड़ी भीग जाएँ। और मज़े की बात सुनो! पूरी टॉफ़ी नहीं, सिर्फ़ उसकी बाहरी रंगीन परत ये जादू करती है! अब प्लेट को बिल्कुल मत हिलाना... और देखो, आगे क्या होता है।

1:43रंगों की दौड़

पानी छूते ही, टॉफ़ियों के चारों ओर रंगीन बादल-से बनने लगते हैं। फिर हर टॉफ़ी से एक रंगीन धारी निकलती है। और वो प्लेट के बीच की ओर बढ़ने लगती है। बिल्कुल साइकिल के पहिये की तीलियों जैसी! कुछ ही पलों में... पूरी प्लेट पर गोल इंद्रधनुष तैयार! और देखो, धारियों के बीच की लकीरें कितनी साफ़ हैं। जैसे किसी ने पेंसिल से खींच दी हों। पर ये रंग आए कहाँ से? हमारा पहला सुराग, टॉफ़ी की परत में छिपा है।

2:20पहला सुराग: परत

टॉफ़ी की बाहरी परत ज़्यादातर चीनी से बनी होती है। और उसमें खाने वाला रंग मिला होता है। चीनी की एक खास आदत है। पानी मिलते ही, वो घुल जाती है। पर घुलने का मतलब गायब होना नहीं है! चीनी के बहुत ही नन्हे-नन्हे कण होते हैं। इतने छोटे, कि आँखों से तो क्या, साधारण माइक्रोस्कोप से भी न दिखें। ये कण पानी के कणों के बीच फैल जाते हैं। और चीनी के साथ-साथ, रंग भी घुलकर बाहर आ जाता है। तो रंग वहीं से आया! लेकिन रुको। घुलना तो समझ आ गया। पर रंग चलकर बीच तक क्यों जाता है? ये बताएगा, हमारा दूसरा सुराग।

3:12दूसरा सुराग: फैलना

सोचो, तुम एक छोटे-से कमरे में हो। कमरा लोगों से ठसाठस भरा है। अचानक दरवाज़ा खुलता है, और बाहर है एक बड़ा, खाली मैदान। तुम क्या करोगे? बाहर की ओर फैल जाओगे! घुली हुई चीनी और रंग भी ठीक यही करते हैं। टॉफ़ी के पास, वो बहुत ज़्यादा भरे होते हैं। और बीच का पानी, लगभग खाली। इसलिए वो भीड़ से खाली जगह की ओर फैलते हैं। वैज्ञानिक इसे कहते हैं, विसरण। और हैरानी की बात सुनो! पानी के कण हर समय हिलते-डुलते रहते हैं। एकदम शांत दिखने वाले गिलास में भी! यही धक्का-मुक्की रंगों को आगे बढ़ाती है। पर गुनगुना पानी ही क्यों? तीसरा सुराग, गर्मी में छिपा है।

4:09तीसरा सुराग: गर्मी

गुनगुने पानी के कण, ठंडे पानी के कणों से ज़्यादा तेज़ हिलते हैं। मान लो, तुम दो प्लेटें बगल में रखते हो। एक में ठंडा पानी, एक में गुनगुना। गुनगुने वाली प्लेट में, रंग जल्दी निकलते हैं। और तेज़ी से फैलते हैं। ठंडे पानी वाली प्लेट में? रंग धीरे-धीरे चलते हैं, आलस से। जैसे सुबह-सुबह उठने का मन ही न हो! इसीलिए तो गरम दूध में चीनी जल्दी घुल जाती है। तो अब हम जानते हैं, रंग कहाँ से आए, और क्यों दौड़े। पर असली रहस्य अब भी बाकी है। ये रंग आपस में मिलते क्यों नहीं? जवाब सुनकर तुम हैरान रह जाओगे!

4:59बड़ा राज़

असली राज़ ये है... रंग मिलने से मना नहीं कर रहे! हर टॉफ़ी की परत में, लगभग बराबर चीनी होती है। इसलिए हर टॉफ़ी से निकला पानी भी, लगभग एक जैसा मीठा होता है। जब लाल धारी, पीली धारी से मिलती है, तो दोनों तरफ़ चीनी की भीड़ लगभग बराबर होती है। इसलिए बगल की ओर धक्का बहुत कम लगता है। और हर रंग अपनी ही राह पर, सीधा बीच की ओर बढ़ता है। यानी जो दीवार हमें दिख रही थी... वो असल में दीवार है ही नहीं! वो तो बस दो बराबर भीड़ें हैं, जो कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। और अब देखो, एक खेल से ये बात कितनी आसानी से समझ आती है।

5:47दौड़ की पटरियाँ

कल्पना करो। एक गोल मैदान है। उसके किनारे-किनारे बच्चे खड़े हैं। हर बच्चे ने अलग रंग की टी-शर्ट पहनी है। सीटी बजती है! और सब एक साथ, बीच में रखी गेंद की ओर दौड़ते हैं। हर बच्चा बराबर तेज़ी से दौड़ रहा है। उसके दाएँ-बाएँ भी उतनी ही भीड़ है। तो कोई अपनी पटरी छोड़कर बगल में क्यों जाएगा? सब अपनी-अपनी सीधी लकीर में दौड़ते हैं। और ऊपर से देखो, तो बनता है... एक रंग-बिरंगा पहिया! बिल्कुल यही तुम्हारी प्लेट पर हो रहा है। बस बच्चों की जगह हैं, चीनी और रंग के अनगिनत नन्हे कण। पर क्या ये रंग हमेशा अलग ही रहेंगे? थोड़ा इंतज़ार करो...

6:41इंतज़ार का कमाल

अगर तुम प्लेट को कुछ देर ऐसे ही छोड़ दो, तो धारियों की किनारियाँ धीरे-धीरे धुंधली होने लगती हैं। क्योंकि कण कभी रुकते नहीं। वो हल्के-हल्के हिलते रहते हैं। और आख़िरकार, रंग आपस में मिलने लगते हैं। विसरण की एक मज़ेदार बात सुनो। छोटी दूरी पर ये बड़ा फुर्तीला है। पर लंबी दूरी पर, बहुत ही धीमा। तो साफ़ धारियाँ हमेशा नहीं रहतीं। बस कुछ समय के लिए। आसमान के इंद्रधनुष की तरह! और हाँ, याद रखना। भीगी टॉफ़ियाँ खाने के लिए नहीं हैं। और पानी हमेशा किसी बड़े की मदद से ही लेना। तो अब चलो, उस पहली पहेली पर लौटते हैं।

7:33रहस्य सुलझा

तो सारे सुराग जुड़ गए! चीनी की परत पानी में घुलती है। फिर भीड़ से खाली जगह की ओर फैलती है। और बराबर मीठी धारियाँ, एक-दूसरे को बगल में धक्का नहीं देतीं। अब उस सफ़ेद प्लेट को फिर से देखो। लाल धारी, पीली धारी के ठीक बगल में चल रही है। पहले ये जादू लग रहा था, है ना? पर अब तुम जानते हो। ये अनगिनत नन्हे कणों की, बराबरी वाली दौड़ है। हर रंग अपनी पटरी पर, सीधा बीच की ओर भाग रहा है। और ये जानकर... वो इंद्रधनुष पहले से भी ज़्यादा सुंदर लगता है।

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शृंखला: science (हिन्दी)