सबसे छोटा, सबसे बड़ा और बर्फ़ बनकर जागने वाला मेंढक!
सारांश
क्या कोई मेंढक पूरा जमकर बर्फ़ बन सकता है और फिर बसंत में उछलकर चल सकता है? इस वीडियो में मिलिए नाखून से छोटे मेंढक, बिल्ली जितने भारी मेंढक, काँच जैसे पारदर्शी मेंढक और बर्फ़ में जम जाने वाले कमाल के मेंढक से।
पूरा पाठ
0:00बर्फ़ वाला रहस्य
सोचिए... एक मेंढक, जो सर्दियों में पूरा जम जाता है। बिल्कुल बर्फ़ की तरह! उसका दिल रुक जाता है। साँस भी रुक जाती है... और फिर बसंत आता है। वो उछलकर चल देता है! क्या ये सच हो सकता है? दुनिया में अनोखे रिकॉर्ड्स की किताबें होती हैं। उनमें मेंढकों को भी जगह मिलती है। कोई सबसे छोटा है, कोई सबसे बड़ा। कोई तो इतना पारदर्शी, कि आप उसके आर-पार देख लें! आज हम चार रिकॉर्ड-तोड़ मेंढकों से मिलेंगे। और आखिर में जानेंगे, वो बर्फ़ वाला मेंढक ज़िंदा कैसे लौटता है। तो चलिए, शुरुआत करते हैं सबसे नन्हे से... इतना नन्हा, कि आँखें गड़ाकर देखना पड़ेगा!
0:52नन्हा सा चैंपियन
ये है पापुआ न्यू गिनी का घना वर्षावन। ज़मीन पर सूखी पत्तियाँ बिखरी हैं। उनके बीच से एक आवाज़ आती है... चीं, चीं! पर बोलने वाला दिखता ही नहीं। क्यों? क्योंकि वो दुनिया के सबसे छोटे मेंढकों में से एक है! वैज्ञानिकों ने इसे दो हज़ार नौ में खोजा था। पूरा बड़ा होकर भी, ये बस सात-आठ मिलीमीटर का होता है। यानी आपके नाखून से भी छोटा! ये एक छोटे से सिक्के पर आराम से बैठ जाए। और फिर भी जगह बच जाए! पर इतना छोटा होना... कोई मुसीबत है? या कोई सुपरपावर?
1:38छोटा होने का फ़ायदा
चलिए, इसे आपके नाखून के बगल में रखते हैं। एक तरफ़ आपका नाखून। दूसरी तरफ़ ये मेंढक। और जीत गया... मेंढक! छोटे होने की रेस में! छोटा होने का एक फ़ायदा है। ये सूखी पत्तियों में आसानी से छिप जाता है। और ये बहुत नन्हे-नन्हे कीड़े खाता है। इतने नन्हे, कि बड़े मेंढक उन्हें देखते भी नहीं। एक और कमाल की बात सुनो! इसके बच्चे टैडपोल बनकर पानी में नहीं तैरते। वो अंडे से सीधे नन्हे मेंढक बनकर निकलते हैं। तो सबसे छोटा तो देख लिया... अब तैयार हो जाओ! अगला मेंढक एक बिल्ली जितना भारी है!
2:29विशाल गोलियथ
मिलिए गोलियथ मेंढक से! ये पश्चिमी अफ़्रीका में रहता है। कैमरून और इक्वेटोरियल गिनी में। तेज़ बहती नदियों के पास। ये दुनिया का सबसे बड़ा मेंढक है! इसका शरीर तीस सेंटीमीटर से भी लंबा हो सकता है। और वज़न? तीन किलो से भी ज़्यादा... लगभग एक पालतू बिल्ली जितना! सोचो, वो नन्हा मेंढक इसके बगल में खड़ा हो। कैसा लगेगा! पर इसका सबसे बड़ा कमाल इसका साइज़ नहीं है। रुको... देखो, ये पत्थरों के साथ क्या करता है...
3:11पत्थरों का कारीगर
वैज्ञानिकों ने कुछ अनोखा देखा। गोलियथ मेंढक नदी किनारे छोटे-छोटे तालाब बनाते हैं। अपने अंडों के लिए! हाँ, मेंढक इंजीनियर! पहला कदम: कंकड़-पत्थर हटाओ। दूसरा कदम: गोल दीवार बनाओ। तीसरा कदम: अंदर शांत पानी, और उसमें अंडे! कुछ पत्थर तो दो किलो तक भारी होते हैं। फिर भी ये मेंढक उन्हें खिसका देता है! इस तालाब में अंडे तेज़ धारा में बहते नहीं। बड़ा मेंढक, बड़ा काम! पर अगला मेंढक कुछ और ही करता है। ऐसा, जो कोई पत्थर नहीं कर सकता... वो लगभग गायब हो जाता है!
3:59काँच जैसा मेंढक
अब चलते हैं मध्य और दक्षिण अमेरिका। यहाँ जंगल बादलों से ढके रहते हैं। एक पत्ती के नीचे, एक मेंढक चिपका है। चमकीला हरा मेंढक। पर इसे नीचे से देखो! इसका पेट काँच जैसा पारदर्शी है! इसका धड़कता दिल साफ़ दिखता है। खाना पचाने वाले अंग भी दिखते हैं। इसीलिए इसे कहते हैं ग्लास फ्रॉग। यानी, काँच का मेंढक! दिन में ये पत्ती पर सोता है। इसकी हरी-सी चमड़ी से रोशनी आर-पार निकल जाती है। फिर वैज्ञानिकों ने सोते हुए काँच-मेंढक को ध्यान से देखा। और उन्हें कुछ ऐसा दिखा... जिसने सब बदल दिया।
4:50छिपा हुआ राज़
हमारा खून लाल क्यों होता है? नन्ही-नन्ही लाल रक्त कोशिकाओं की वजह से। जागते हुए काँच-मेंढक में, ये लाल कोशिकाएँ पूरे शरीर में घूमती हैं। इसलिए वो पूरा पारदर्शी नहीं होता। पर सोते समय, कमाल होता है! ये अपनी ज़्यादातर लाल कोशिकाएँ लीवर में छिपा लेता है! जागते समय: लाल रंग दिखता है। सोते समय: लगभग गायब! ऐसे ये दो से तीन गुना ज़्यादा पारदर्शी हो जाता है। और यहीं हमें असली राज़ समझ आता है। मेंढकों के सबसे बड़े रिकॉर्ड साइज़ में नहीं हैं। वो उनके शरीर के अंदर छिपे हैं! उनका शरीर खुद को बदल सकता है। और यही बात हमें वापस ले जाती है... उस मेंढक तक, जो पूरा जम जाता है...
5:47बर्फ़ बना मेंढक
उत्तरी अमेरिका के जंगलों में रहता है वुड फ्रॉग। जब सर्दी आती है, ये पत्तियों के नीचे बैठ जाता है। और फिर... धीरे-धीरे जमने लगता है। पहला: त्वचा पर बर्फ़ जमती है। दूसरा: शरीर का बहुत सारा पानी बर्फ़ बन जाता है। तीसरा: दिल धड़कना बंद। साँस भी बंद। अब ये मेंढक है... एक मेंढक-आइसक्रीम! पर ये टूटता क्यों नहीं? क्योंकि इसका लीवर ढेर सारी शक्कर बनाता है। और वो शक्कर पूरे शरीर में भेज देता है। ये शक्कर हर नन्ही कोशिका के अंदर पहुँचती है। और उसे बचाती है। जैसे गाढ़ा शरबत, सादे पानी जितनी आसानी से नहीं जमता। हफ़्तों तक ये ऐसे ही जमा रह सकता है! पर असली जादू तो तब होता है... जब बसंत आता है...
6:48बसंत में जागना
बर्फ़ पिघलती है। धूप गरम होती है। जमा हुआ मेंढक भी धीरे-धीरे पिघलने लगता है। फिर एक पल आता है... उसका दिल फिर से धड़कने लगता है! साँसें लौट आती हैं। कुछ ही देर में वो हिलने लगता है। और फिर... उछल! वो पास के तालाब की ओर कूद पड़ता है। जल्द ही पूरा जंगल आवाज़ों से भर जाता है। बत्तख जैसी आवाज़ें... 'क्वैक-क्वैक'! तो अब, उस सवाल के जवाब का समय है। वही सवाल, जिससे हमने शुरुआत की थी।
7:29आख़िरी सवाल
नाखून से छोटा मेंढक। बिल्ली जितना भारी मेंढक। काँच जैसा मेंढक। और बर्फ़ बनकर लौटने वाला मेंढक। इन सबका असली रिकॉर्ड, उनके शरीर के अंदर छिपा है। तो हाँ, शुरुआत वाली बात सच है! एक मेंढक सच में जम सकता है। उसका दिल रुक सकता है। और बसंत में, वो फिर उछल सकता है! पर ज़रा सोचो... पूरा शरीर बर्फ़ बना है। दिल बिल्कुल चुप है। तो उस नन्हे दिल को कौन बताता है... कि अब फिर से धड़कने का समय आ गया है?
अन्य भाषाओं में
- English: Frog Record-Breakers: Tiny, Giant, See-Through and Frozen Solid!
- संस्कृतम्: नखात् लघुः, मार्जारवत् गुरुः! विश्वविजेतारः मण्डूकाः
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शृंखला: science (हिन्दी)