Samvada

मंगल के आलू जैसे चाँद की मिट्टी लाने निकला जापान का यान!

2026-10-19 · YouTube पर देखें

सारांश

मंगल ग्रह के पास एक ऐसा चाँद है जो बिल्कुल आलू जैसा दिखता है! जापान का नया अंतरिक्ष यान एम-एम-एक्स पाँच साल की यात्रा पर निकला है, ताकि वह इस चाँद फोबोस की मिट्टी उठाकर धरती पर ला सके, और साथ में एक छोटा पहियों वाला रोवर भी ले गया है।

पूरा पाठ

0:00आलू जैसा चाँद

क्या तुम जानते हो... मंगल ग्रह के आसमान में एक चाँद घूमता है? और वो दिखता है, बिल्कुल एक बड़े, ऊबड़-खाबड़ आलू जैसा! अब एक अंतरिक्ष यान निकल पड़ा है। वो इस आलू-चाँद का एक टुकड़ा उठाएगा। और उसे सीधे धरती पर लाएगा! हाँ, तुमने सही सुना। जापान की अंतरिक्ष एजेंसी ने एक नया यान भेजा है। इसका नाम है, एम-एम-एक्स। मतलब, मंगल के चाँदों की खोज। ये यान लगभग पाँच साल की लंबी यात्रा पर है। वहाँ जाना, और फिर वापस आना। सोचो... जब ये घर लौटेगा, तुम पाँच साल बड़े हो चुके होगे! अगर तुम अभी आठ साल के हो, तो तब तेरह साल के होगे। लेकिन रुको! पहले ये तो जानें, ये आलू-चाँद है कौन? और ये इतना खास क्यों है?

1:00फोबोस से मिलो

इस आलू-चाँद का नाम है... फोबोस। मंगल ग्रह के पास दो छोटे चाँद हैं। एक है फोबोस। दूसरा उससे भी छोटा है, उसका नाम है डीमोस। हमारा चाँद तो गोल गेंद जैसा है। पर फोबोस गोल नहीं है। ये बहुत छोटा है। इसकी सबसे लंबी तरफ़ बस लगभग सत्ताईस किलोमीटर है। एक तेज़ कार में बैठो, तो लगभग बीस मिनट में, इसके एक छोर से दूसरे छोर पहुँच जाओ! और अब सुनो एक कमाल की बात। फोबोस मंगल के बहुत पास घूमता है। इतना पास, कि एक दिन में मंगल के तीन चक्कर लगा लेता है! और हमारा चाँद? वो धरती का एक चक्कर लगाने में लगभग एक महीना लेता है। फोबोस पर एक बहुत बड़ा गड्ढा भी है। इसके छोटे आकार के हिसाब से, वो बहुत ही विशाल है। पर वैज्ञानिक इस छोटे से चाँद की मिट्टी क्यों चाहते हैं? इसका जवाब... एक बड़ा रहस्य है!

2:11बड़ा रहस्य

वैज्ञानिक एक बड़े सवाल का जवाब ढूँढ रहे हैं। फोबोस आखिर आया कहाँ से? इसके दो जवाब हो सकते हैं। पहला जवाब... शायद बहुत पहले फोबोस अंतरिक्ष में घूमता एक पथरीला टुकड़ा था। मंगल ने उसे अपनी ओर खींच लिया। और अपना साथी बना लिया। दूसरा जवाब... शायद बहुत समय पहले, एक बड़ी चट्टान मंगल से टकराई। मंगल के कुछ टुकड़े उछलकर अंतरिक्ष में चले गए। फिर वो टुकड़े धीरे-धीरे आपस में जुड़ गए। और बन गया एक नया चाँद! तो कौन-सा जवाब सही है? ये फोबोस की मिट्टी बताएगी। ये तो किसी जासूसी कहानी जैसा है! यहाँ सुराग छिपे हैं, धूल के छोटे-छोटे कणों में! पर इतनी दूर जाने के लिए, पहले चाहिए एक बहुत ताक़तवर सवारी।

3:13धमाकेदार उड़ान

और वो सवारी है... एक विशाल रॉकेट! जापान के एक द्वीप पर एक अंतरिक्ष केंद्र है। वहीं से ये रॉकेट आसमान की ओर उड़ा। नीचे से तेज़ रोशनी निकली, और ढेर सारा धुआँ! रॉकेट को बहुत तेज़ चलना पड़ता है। तभी वो धरती के खिंचाव से निकल पाता है, और अंतरिक्ष में पहुँचता है। सोचो, एक गेंद को इतनी ज़ोर से उछालो, कि वो कभी नीचे ही न गिरे! ऊपर पहुँचकर, रॉकेट यान को अंतरिक्ष में छोड़ देता है। अब यान अपनी लंबी यात्रा पर निकल पड़ता है। मंगल तक पहुँचने में इसे लगभग एक साल लगेगा। पर ये यान बना कैसे है? और सुना है, इसके अंदर एक छोटा सा मुसाफ़िर भी छिपा बैठा है! चलो, अंदर झाँकते हैं।

4:09यान के तीन हिस्से

पहले यान को ठीक से देख लेते हैं। ये यान तीन हिस्सों से बना है। जैसे एक ट्रेन के तीन डिब्बे, आपस में जुड़े हों। पहला हिस्सा है, धकेलने वाला हिस्सा। इसमें ईंधन और इंजन हैं। ये यान को मंगल तक पहुँचाते हैं। और वहाँ पहुँचकर उसे धीमा करते हैं। दूसरा हिस्सा है, खोज वाला हिस्सा। इसमें कैमरे हैं, मापने वाले यंत्र हैं। उतरने वाले पैर हैं, और मिट्टी उठाने वाली मशीनें भी। तीसरा हिस्सा है, घर-वापसी वाला हिस्सा। ये मिट्टी को सुरक्षित रखेगा, और धरती तक लाएगा। यान के दोनों तरफ़ बड़े सोलर पैनल भी हैं। ये पंखों की तरह फैलते हैं। और सूरज की रोशनी से बिजली बनाते हैं। और अब... मिलते हैं उस छोटे मुसाफ़िर से!

5:09पहियों वाला रोवर

ये मुसाफ़िर है, एक छोटा सा रोवर। यानी पहियों पर चलने वाली एक रोबोट गाड़ी। इसे फ्रांस और जर्मनी के वैज्ञानिकों ने मिलकर बनाया है। इसका वज़न लगभग पच्चीस किलो है। यानी एक बड़े, भरे हुए सूटकेस जितना। इसके चार पहिए हैं। और ये अपने आप सीधा हो सकता है! फोबोस पर ये शायद उलटा-पुलटा होकर उतरेगा। पर कोई बात नहीं! ये अपनी पहियों वाली टाँगें घुमाएगा, और खुद को पलट लेगा। ये फोबोस की ज़मीन पर बहुत धीरे-धीरे चलेगा। लगभग एक घोंघे जितनी रफ़्तार से! इसके कैमरे ज़मीन की तस्वीरें लेंगे। इसके यंत्र पता लगाएँगे, कि मिट्टी कितनी नरम है, या कितनी सख़्त। ये जानकारी बड़े यान के बहुत काम आएगी। क्योंकि उसे भी वहाँ उतरना है। पर फोबोस पर उतरना इतना मुश्किल क्यों है? इसका कारण... तुम्हें हैरान कर देगा!

6:20बहुत कम खिंचाव

फोबोस बहुत छोटा है। इसलिए इसका खिंचाव, यानी गुरुत्वाकर्षण, बहुत ही कम है। धरती तुम्हें ज़मीन की ओर अच्छे से पकड़कर रखती है। पर फोबोस? वो बस हल्का सा खींचता है। मान लो, धरती पर तुम्हारा वज़न तीस किलो है। तो फोबोस पर तुम्हें अपना वज़न... बस कुछ सिक्कों जितना लगेगा! है न कमाल? इसीलिए यान को बहुत सावधानी से उतरना होगा। धीरे-धीरे, जैसे कोई पंख हवा में तैरता हुआ नीचे आता है। अगर वो ज़्यादा तेज़ी से नीचे आया, तो उछलकर वापस अंतरिक्ष की ओर जा सकता है! यान वहाँ बस कुछ ही घंटे रुकेगा। और उतने ही समय में, उसे अपना सबसे ज़रूरी काम करना है। तो वो मिट्टी उठाएगा कैसे? चलो, देखते हैं उसका कमाल का औज़ार!

7:22मिट्टी उठाने का कमाल

यान के पास एक लंबी रोबोट भुजा है। इस भुजा के सिरे पर एक खोखली नली लगी है। ये नली ज़मीन में धँसती है, और अंदर मिट्टी भर लेती है। बिल्कुल वैसे, जैसे तुम एक स्ट्रॉ को रेत में दबाओ, और उसमें रेत भर जाए! एक और औज़ार भी है। ये गैस का एक तेज़ झोंका छोड़ता है। ये झोंका धूल को उड़ाता है, और सीधे एक डिब्बे में भर देता है। ये औज़ार अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी ने दिया है। वैज्ञानिक कम से कम दस ग्राम मिट्टी लाना चाहते हैं। दस ग्राम कितना होता है? बस दो-तीन चम्मच चीनी जितना! सुनने में कम लगता है, है न? पर इतनी दूर से इतनी मिट्टी लाना, बहुत बड़ी बात है। फिर ये मिट्टी एक मज़बूत डिब्बे में बंद कर दी जाएगी। और जानते हो? जापान पहले भी दो बार ऐसा कर चुका है! उसने अंतरिक्ष की चट्टानों से मिट्टी लाकर दिखाई है। इन चट्टानों को क्षुद्रग्रह कहते हैं। लेकिन यान का काम... अभी खत्म नहीं हुआ है।

8:39घर वापसी की यात्रा

यान लगभग तीन साल तक मंगल के पास रहेगा। इस दौरान वो फोबोस के चारों ओर चक्कर लगाएगा। उसकी हर ऊबड़-खाबड़ जगह की तस्वीरें लेगा। वो छोटे चाँद डीमोस के पास से भी गुज़रेगा। और उसे भी ध्यान से देखेगा। वो मंगल के मौसम पर भी नज़र रखेगा। जैसे वहाँ उड़ती धूल, और पतले बादल। ऊपर से मंगल कैसा लगेगा? एक बड़ी, लाल-नारंगी गेंद जैसा! फिर आएगा... वापसी का समय। घर-वापसी वाला हिस्सा, बाकी यान से अलग हो जाएगा। और धरती की ओर उड़ चलेगा। धरती के पास पहुँचकर, वो मिट्टी वाला डिब्बा नीचे भेजेगा। डिब्बा पैराशूट खोलेगा, और धीरे से ज़मीन पर उतरेगा। ये सब होगा, लगभग साल दो हज़ार इकतीस में। और तब शुरू होगा असली मज़ा! जब वैज्ञानिक उस मिट्टी को अपनी प्रयोगशाला में खोलेंगे। चलो, अब तक की सबसे शानदार बातें, एक बार फिर याद करते हैं।

9:55याद करो और आज़माओ

तो आज हमने क्या सीखा? मंगल के पास एक आलू जैसा चाँद है। उसका नाम है फोबोस। वो एक दिन में मंगल के तीन चक्कर लगाता है! जापान का यान पाँच साल की यात्रा पर निकला है। वो फोबोस की मिट्टी लाएगा। साथ में एक छोटा रोवर भी गया है। जो खुद को पलटकर सीधा कर सकता है! और फोबोस पर खिंचाव इतना कम है, कि तुम्हारा वज़न बस कुछ सिक्कों जितना लगेगा! अब तुम्हारे लिए एक मज़ेदार चुनौती। किसी बड़े से पूछो, और रसोई से एक आलू लो। उसे काटना नहीं। बस ध्यान से देखो। उसके छोटे-छोटे गड्ढे और उभार, फोबोस की सतह जैसे लगते हैं। अब उस आलू को एक गेंद के चारों ओर धीरे-धीरे घुमाओ। जैसे फोबोस मंगल के चारों ओर घूमता है। और आज रात खाने पर, अपने परिवार को बताना... कि मंगल का एक चाँद आलू जैसा है! देखना, सब हैरान रह जाएँगे! अगली बार फिर मिलेंगे, अंतरिक्ष के एक नए कमाल के साथ। तब तक, आसमान को देखते रहो। और सवाल पूछते रहो!

अन्य भाषाओं में

शृंखला: science (हिन्दी)