रात की खुफ़िया उड़ान: करोड़ों चिड़ियाँ अँधेरे में रास्ता कैसे ढूँढती हैं?
सारांश
जब तुम सो रहे होते हो, तब आसमान में करोड़ों नन्ही चिड़ियाँ एक लंबे सफ़र पर निकलती हैं! जानो कि वे तारों और धरती के चुंबक की मदद से रास्ता कैसे ढूँढती हैं, और मौसम रडार उन्हें नक्शे पर बादलों की तरह कैसे देख लेता है।
पूरा पाठ
0:00रात का रहस्य
क्या तुम्हें पता है कि आज रात, जब तुम आराम से अपने बिस्तर में सो रहे होगे, तुम्हारे सिर के ऊपर आसमान में करोड़ों नन्ही चिड़ियाँ उड़ रही होंगी? जी हाँ, करोड़ों! पतझड़ के मौसम में, दुनिया के कुछ हिस्सों में, सिर्फ़ एक ही रात में बीस करोड़ से भी ज़्यादा चिड़ियाँ एक साथ लंबे सफ़र पर निकल पड़ती हैं। और मज़े की बात? ज़्यादातर लोगों को इसका पता तक नहीं चलता! ये छोटी-छोटी गाने वाली चिड़ियाँ हैं, जैसे फुदकी, गौरैया जैसी चिड़ियाँ और रंग-बिरंगी वॉर्बलर। कुछ तो इतनी हल्की होती हैं कि उनका वज़न बस दो-तीन सिक्कों जितना होता है। सोचो, कुछ सिक्कों जितनी चिड़िया हज़ारों किलोमीटर उड़ती है! तो आज हम इस खुफ़िया रात की उड़ान का राज़ खोलेंगे। लेकिन पहले एक बड़ा सवाल: आख़िर ये चिड़ियाँ अपना घर छोड़कर जाती ही क्यों हैं? जवाब तुम्हें हैरान कर देगा!
0:59सफ़र क्यों?
सोचो, अगर तुम्हारा पसंदीदा खाना अचानक गायब हो जाए, तो तुम क्या करोगे? शायद वहाँ जाओगे जहाँ वो मिलता हो! चिड़ियाँ भी बिल्कुल यही करती हैं। गर्मियों में उत्तर के ठंडे इलाकों में खूब सारे कीड़े-मकोड़े, बीज और फल होते हैं। चिड़ियाँ वहीं घोंसले बनाती हैं और अपने बच्चों को पालती हैं। लेकिन जैसे ही पतझड़ आता है, दिन छोटे होने लगते हैं, हवा ठंडी हो जाती है और कीड़े छिप जाते हैं। अब खाना कम पड़ने लगता है। इसलिए चिड़ियाँ दक्षिण की ओर, गरम जगहों की तरफ़ उड़ जाती हैं, जहाँ सर्दियों में भी खाना मिलता रहता है। और पता है सबसे कमाल की बात क्या है? चिड़ियों के शरीर को खुद पता चल जाता है कि सफ़र का वक़्त आ गया है! दिन की रोशनी कम होते ही उनके अंदर एक बेचैनी जाग जाती है, जैसे छुट्टियों से पहले तुम्हें होती है। पर रुको... ये दिन में क्यों नहीं उड़तीं? रात के अँधेरे में ही क्यों? चलो पता करते हैं!
2:05रात ही क्यों?
रात में उड़ने के तीन बढ़िया कारण हैं। पहला: रात की हवा ठंडी होती है। लंबी उड़ान में चिड़ियों का शरीर बहुत गरम हो जाता है, जैसे दौड़ने के बाद तुम्हारा होता है। ठंडी हवा उन्हें आराम से ठंडा रखती है, और शरीर का पानी भी कम खर्च होता है। दूसरा: रात की हवा ज़्यादा शांत होती है। दिन में सूरज ज़मीन को गरम करता है, जिससे हवा ऊपर-नीचे उछलती रहती है, जैसे ऊबड़-खाबड़ सड़क पर चलती गाड़ी। रात में हवा चिकनी होती है, तो उड़ना आसान! तीसरा, और सबसे चतुर कारण: दिन का समय खाने के लिए बच जाता है। रात भर उड़ो, सुबह उतरो, दिन भर पेट भरकर खाओ, फिर अगली रात दोबारा उड़ान! है ना एकदम स्मार्ट टाइम-टेबल? अब तक तो सब ठीक है। लेकिन एक बड़ी पहेली बाकी है। अँधेरे में, बिना किसी नक्शे के, इन्हें रास्ता कैसे पता चलता है? इसका जवाब ऊपर आसमान में चमक रहा है!
3:08तारों का नक्शा
जवाब है: तारे! हाँ, ये नन्ही चिड़ियाँ तारों को देखकर रास्ता ढूँढती हैं। वैज्ञानिकों ने एक बहुत मज़ेदार प्रयोग किया। उन्होंने कुछ नीली चिड़ियों को एक तारामंडल में रखा, यानी एक गोल कमरा जिसकी छत पर नकली तारे चमकते हैं। जब छत के तारे घुमाए गए, तो चिड़ियों ने भी अपनी दिशा बदल दी! इससे पता चला कि वो सच में तारों को पढ़ रही थीं। चिड़ियाँ आसमान के उस हिस्से को पहचानती हैं जिसके आसपास बाकी सारे तारे गोल-गोल घूमते दिखते हैं। उत्तर में वो जगह ध्रुव तारे के पास होती है, जो लगभग अपनी जगह पर टिका रहता है। ध्रुव तारा पीछे रखो, और सीधे दक्षिण की ओर उड़ते जाओ! और कमाल की बात: छोटी चिड़ियाँ ये हुनर बचपन में ही सीख लेती हैं, घोंसले से रात का आसमान देख-देखकर। यानी उनका पहला स्कूल पूरा आसमान है! लेकिन ज़रा सोचो, अगर बादल छा जाएँ और तारे छिप जाएँ, तब क्या? तब चिड़ियों के पास एक और गुप्त शक्ति है!
4:18धरती का चुंबक
क्या तुमने कभी कम्पास देखा है? उसकी सुई हमेशा उत्तर की ओर इशारा करती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारी पूरी धरती एक बहुत बड़े चुंबक की तरह काम करती है। धरती के चारों ओर अदृश्य चुंबकीय रेखाएँ फैली होती हैं, जो एक ध्रुव से निकलकर दूसरे ध्रुव तक जाती हैं। हम इन्हें न देख सकते हैं, न महसूस कर सकते हैं। लेकिन चिड़ियाँ कर सकती हैं! वैज्ञानिकों को लगता है कि कई चिड़ियाँ इन चुंबकीय रेखाओं को अपनी आँखों की मदद से महसूस करती हैं। शायद उन्हें आसमान पर एक हल्का-सा पैटर्न दिखता है, जैसे किसी ने जादुई चश्मा पहनाकर एक छुपा हुआ रास्ता दिखा दिया हो! यानी उनके अंदर एक कम्पास पहले से फिट है, वो भी बिना बैटरी के! इसके अलावा चिड़ियाँ सूरज डूबने की दिशा, पहाड़, नदियाँ और समुद्र-तट भी याद रखती हैं। तारे, चुंबक, सूरज और ज़मीन, चार-चार नक्शे एक साथ! पर इतनी लंबी उड़ान के लिए ताक़त कहाँ से आती है? चलो उनके खाने की थाली देखते हैं!
5:30उड़ान की तैयारी
सफ़र से पहले चिड़ियाँ एक खास काम करती हैं: खूब सारा खाना! वो जामुन, बीज और कीड़े इतनी तेज़ी से खाती हैं कि कुछ ही हफ़्तों में उनका वज़न लगभग दोगुना हो सकता है। ये अतिरिक्त चर्बी उनका ईंधन है, जैसे गाड़ी के लिए पेट्रोल। अब सुनो एक ज़बरदस्त किस्सा। ब्लैकपोल वॉर्बलर नाम की एक नन्ही चिड़िया है, जिसका वज़न सिर्फ़ बारह ग्राम के आसपास होता है। ये चिड़िया समुद्र के ऊपर से बिना रुके लगभग तीन दिन और तीन रात तक उड़ती है! नीचे सिर्फ़ पानी, कहीं बैठने की जगह नहीं, फिर भी ये नन्ही पायलट हार नहीं मानती। सोचो, तीन दिन तक बिना रुके चलते रहना! नामुमकिन लगता है ना? पर इन चिड़ियों के लिए ये उनका कुदरती हुनर है। और रास्ते में ये अक्सर किसी हरे-भरे पार्क या जंगल में उतरकर आराम भी करती हैं, जैसे लंबे सफ़र में ढाबे पर रुकना। पर रुको, ये उड़ती कितनी ऊँचाई पर हैं? जवाब सुनकर तुम्हारी गर्दन ऊपर उठ जाएगी!
6:41आसमान की परतें
अगर हम आसमान को परतों में बाँटें, तो सबसे नीचे है ज़मीन, जहाँ हमारे घर और पेड़ हैं। उसके ऊपर ऊँची इमारतों की परत है। फिर आती है वो परत जहाँ ज़्यादातर रात की चिड़ियाँ उड़ती हैं, ज़मीन से लगभग आधा किलोमीटर से दो किलोमीटर ऊपर। ये इतनी ऊँचाई है कि चिड़ियाँ नीचे से दिखाई ही नहीं देतीं! कुछ चिड़ियाँ तो इससे भी ऊपर, बादलों के पास तक पहुँच जाती हैं। और सबसे ऊपर, बहुत ऊँचाई पर, बड़े हवाई जहाज़ उड़ते हैं। चिड़ियाँ अपनी ऊँचाई बड़ी समझदारी से चुनती हैं। जिस परत में हवा उनकी पीठ की तरफ़ से बह रही हो, उसी में उड़ती हैं, ताकि हवा उन्हें आगे धकेले, जैसे पीछे से कोई प्यार से धक्का दे दे! इससे ताक़त बचती है और सफ़र तेज़ होता है। लेकिन जब चिड़ियाँ इतनी ऊपर और अँधेरे में छिपी हैं, तो वैज्ञानिक इन्हें गिन कैसे लेते हैं? इसका जवाब एक ऐसी मशीन है जो असल में मौसम के लिए बनी थी!
7:47रडार पर चिड़ियाँ
मौसम रडार एक बड़ी गोल मशीन होती है, जो बारिश और तूफ़ान ढूँढने के लिए बनाई गई थी। ये आसमान में अदृश्य तरंगें भेजती है। जब ये तरंगें बारिश की बूँदों से टकराती हैं, तो वापस लौट आती हैं, और नक्शे पर रंगीन बादल जैसे धब्बे बन जाते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों ने एक मज़ेदार चीज़ देखी। कुछ साफ़ रातों में, जब बारिश का नामोनिशान नहीं था, रडार के नक्शे पर फिर भी बड़े-बड़े गोल धब्बे फूल की तरह खिल उठते थे! सूरज डूबने के थोड़ी देर बाद वो धब्बे दिखते, और सुबह होते-होते गायब हो जाते। पता है वो क्या थे? करोड़ों उड़ती हुई चिड़ियाँ! रडार की तरंगें चिड़ियों से टकराकर लौट रही थीं। आज वैज्ञानिक इसी तरह बड़े-बड़े इलाकों की चिड़ियों को गिनते हैं, और मौसम की तरह चिड़ियों का पूर्वानुमान भी बताते हैं, कि आज रात कितनी चिड़ियाँ उड़ेंगी! है ना कमाल? पर तुम्हें रडार की ज़रूरत नहीं। तुम खुद भी इन्हें खोज सकते हो, अपने कानों से!
9:00रात की आवाज़ें
रात की उड़ान में चिड़ियाँ एक-दूसरे से बात करती रहती हैं! वो छोटी-छोटी 'चिप', 'सी' या 'त्सीप' जैसी आवाज़ें निकालती हैं, जिन्हें उड़ान-पुकार कहते हैं। शायद वो कह रही होती हैं, 'मैं यहाँ हूँ, तुम कहाँ हो?' अगर पतझड़ की किसी शांत रात में तुम खिड़की के पास चुपचाप बैठो, तो ऊपर से ये महीन आवाज़ें सुनाई दे सकती हैं। हर तरह की चिड़िया की आवाज़ अलग होती है, और कुछ वैज्ञानिक सिर्फ़ आवाज़ सुनकर बता देते हैं कि ऊपर से कौन-सी चिड़िया गुज़री! एक और ज़रूरी बात। शहरों की तेज़ रोशनी कभी-कभी इन चिड़ियों को उलझा देती है, क्योंकि वो तारों जैसी चमकती है और उन्हें रास्ते से भटका सकती है। इसलिए कई शहरों में लोग पतझड़ की रातों में फ़ालतू बत्तियाँ बुझा देते हैं, ताकि चिड़ियों को साफ़ अँधेरा आसमान मिले। ज़रा-सा स्विच दबाना, और किसी नन्ही पायलट की मदद हो गई! तो चलो, अब तक की सारी कमाल की बातें एक बार फिर याद करते हैं!
10:08याद रखो!
तो आज हमने क्या-क्या सीखा? पतझड़ में कुछ रातों में बीस करोड़ से भी ज़्यादा चिड़ियाँ एक साथ उड़ती हैं, जब हम सो रहे होते हैं। वो रात में इसलिए उड़ती हैं क्योंकि हवा ठंडी और शांत होती है, और दिन खाने के लिए बच जाता है। वो तारों को पढ़ती हैं, धरती के चुंबक को महसूस करती हैं, और सूरज व ज़मीन के निशान भी याद रखती हैं। कुछ नन्ही चिड़ियाँ तो तीन दिन तक बिना रुके समुद्र पार कर जाती हैं! और मौसम रडार उन्हें नक्शे पर बादलों की तरह देख लेता है। अब तुम्हारे लिए एक मज़ेदार चुनौती! आज रात सोने से पहले, किसी बड़े के साथ खिड़की के पास दो मिनट चुपचाप बैठो और ऊपर से आती महीन 'चिप' आवाज़ें सुनने की कोशिश करो। और परिवार से कहो कि घर की फ़ालतू बाहरी बत्तियाँ बुझा दें, ताकि चिड़ियों को रास्ता साफ़ दिखे। फिर सबको ये राज़ बताना: 'पता है, अभी हमारे ऊपर करोड़ों चिड़ियाँ उड़ रही हैं!' तो अगली बार जब तुम रात को आसमान देखो, तो याद रखना, वहाँ ऊपर एक पूरी खुफ़िया उड़ान चल रही है। शुभ रात्रि, नन्हे खोजियों!
अन्य भाषाओं में
- English: Night Flight: The Secret Bird Journey While You Sleep!
- संस्कृतम्: वयं स्वपिमः, विंशतिकोटिः पक्षिणः उड्डीयन्ते!
और वीडियो
शृंखला: science (हिन्दी)