जोनाथन: 194 साल का कछुआ जो बिजली के बल्ब से भी पुराना है!
सारांश
मिलो जोनाथन से, एक विशाल कछुआ जो लगभग 1832 में अंडे से निकला था और आज भी सेंट हेलेना टापू पर मज़े से खीरे खा रहा है! जानो कि उसने टेलीफ़ोन, बल्ब और हवाई जहाज़ जैसे आविष्कारों को कैसे आते देखा, और कछुए इतना लंबा कैसे जीते हैं।
पूरा पाठ
0:00मिलो जोनाथन से
सोचो, एक ऐसा जानवर जो तुम्हारे दादा-दादी के दादा-दादी के दादा-दादी से भी पहले अंडे से निकला था, और आज भी मज़े से ज़िंदा है! आज सुबह भी उसने नाश्ते में खीरा खाया। मिलो जोनाथन से! जोनाथन एक विशाल कछुआ है, और उसकी उम्र है लगभग एक सौ चौरानवे साल। हाँ, तुमने बिल्कुल सही सुना, एक सौ चौरानवे साल! वो आज धरती पर ज़िंदा सबसे बूढ़ा ज़मीनी जानवर है। जब जोनाथन अंडे से निकला, तब दुनिया में न टेलीफ़ोन था, न बिजली का बल्ब, और न ही पैडल वाली साइकिल। रात को घरों में बस मोमबत्तियाँ और लालटेन जलती थीं! और ये कछुआ तब से चलता आ रहा है... धीरे-धीरे, बहुत धीरे-धीरे। लेकिन रुको! जोनाथन की कहानी एक ऐसी अनोखी जगह पर है, जहाँ पहुँचना भी अपने आप में एक बड़ा कारनामा है।
1:03समुद्र के बीच टापू
जोनाथन रहता है सेंट हेलेना नाम के एक छोटे-से टापू पर। ये टापू दक्षिण अटलांटिक महासागर के बीचों-बीच है, चारों तरफ़ बस पानी ही पानी! सबसे पास का बड़ा ज़मीन का टुकड़ा, यानी अफ़्रीका, यहाँ से लगभग उन्नीस सौ किलोमीटर दूर है। इतनी दूरी कि अगर तुम रोज़ दस किलोमीटर चलो, तो भी छह महीने से ज़्यादा लग जाएँ... और वो भी पानी पर चलकर, जो तुम कर ही नहीं सकते! ये टापू बहुत पहले ज्वालामुखियों से बना था। यहाँ ऊँची हरी पहाड़ियाँ हैं, खड़ी चट्टानें हैं, और समुद्र के किनारे लहरें ज़ोर-ज़ोर से टकराती हैं। वाह-तथ्य: बहुत सालों तक यहाँ हवाई जहाज़ से आना मुमकिन ही नहीं था! लोग कई दिनों तक जहाज़ में सफ़र करके यहाँ आते थे। तो सोचो, एक भारी-भरकम कछुआ यहाँ पहुँचा कैसे? चलो पता करते हैं!
2:03जोनाथन का सफ़र
जोनाथन सेंट हेलेना पर अंडे से नहीं निकला था। वो आया था सेशेल्स नाम के द्वीपों की तरफ़ से, जो हिंद महासागर में हैं। वहाँ ऐसे विशाल कछुए रहते हैं। साल अठारह सौ बयासी में, जोनाथन को एक जहाज़ पर बिठाकर सेंट हेलेना लाया गया। सोचो, एक कछुआ समुद्री सफ़र पर! उसे शायद समझ भी नहीं आया होगा कि ये सब इतना हिलता-डुलता क्यों है। और सबसे मज़ेदार बात? जब वो यहाँ पहुँचा, तब वो कोई छोटा बच्चा नहीं था। वो पहले से ही पूरा बड़ा, जवान कछुआ था! इसीलिए वैज्ञानिकों का अंदाज़ा है कि तब उसकी उम्र लगभग पचास साल रही होगी। यानी जोनाथन ने अपने पहले पचास साल कहीं और बिताए, और फिर एक नए घर में आ गया। लेकिन उसे कहाँ रखा गया? वो जगह भी कमाल की है!
2:58बगीचे वाला घर
सेंट हेलेना पर एक बहुत बड़ा, पुराना सफ़ेद घर है, जिसके चारों तरफ़ फैला हुआ है एक हरा-भरा बगीचा। यही है जोनाथन का घर! यहाँ ऊँचे-ऊँचे पेड़ हैं, नरम घास है, और धूप में आराम करने के लिए खूब जगह। जोनाथन यहाँ घूमता है, घास चरता है, और धूप सेंकता है। सुनने में किसी लंबी छुट्टी जैसी ज़िंदगी लगती है ना? और वो अकेला नहीं है! उसके साथ कुछ और विशाल कछुए भी रहते हैं। उनके नाम हैं डेविड, एम्मा और फ़्रेड। सोचो, एक बगीचे में कछुओं का पूरा परिवार! वाह-तथ्य: जोनाथन इस बगीचे में एक सौ चालीस साल से भी ज़्यादा समय से रह रहा है! लेकिन असली सवाल ये है, जब जोनाथन छोटा था, तब दुनिया कैसी दिखती थी?
3:54पुरानी दुनिया
चलो, एक टाइम मशीन में बैठते हैं और वापस चलते हैं साल अठारह सौ बत्तीस में, जब जोनाथन अंडे से निकला था। उस समय सड़कों पर कोई कार नहीं थी। लोग घोड़ागाड़ी में घूमते थे, या फिर बस पैदल! कोई हवाई जहाज़ नहीं, कोई बस नहीं, और रेलगाड़ियाँ तो अभी-अभी बननी शुरू हुई थीं। घर के अंदर भी सब अलग था। कोई फ़्रिज नहीं, कोई बिजली का पंखा नहीं, कोई टीवी नहीं। शाम होते ही लोग मोमबत्ती और तेल के दीये जलाते थे। वाह-तथ्य: उस समय किसी दूर देश में चिट्ठी भेजनी हो, तो वो कई हफ़्तों में, कभी-कभी तो महीनों में पहुँचती थी! लेकिन फिर, जब जोनाथन धीरे-धीरे बड़ा हो रहा था, दुनिया में एक के बाद एक जादुई चीज़ें आने लगीं।
4:43नए आविष्कार
सबसे पहले, पैडल वाली साइकिल! जब जोनाथन लगभग तीस साल का था, तब लोगों ने ऐसी साइकिलें बनानी शुरू कीं जिनमें पैडल लगे थे। कुछ पुरानी साइकिलों का आगे का पहिया तो इतना बड़ा था कि उस पर चढ़ना किसी छोटी दीवार पर चढ़ने जैसा था! फिर आया टेलीफ़ोन, साल अठारह सौ छिहत्तर में। पहली बार लोग दूर बैठे किसी इंसान की आवाज़ तार के ज़रिए सुन सकते थे! तब जोनाथन लगभग चवालीस साल का था। और फिर, बस तीन साल बाद, आया ऐसा बिजली का बल्ब जो घंटों तक जलता रहे! तब जोनाथन सैंतालीस साल का था। अब रात का अंधेरा भगाने के लिए मोमबत्ती की ज़रूरत नहीं थी। सोचो, ये सारी चीज़ें जो आज तुम्हें बिल्कुल आम लगती हैं, जोनाथन के ज़माने में एकदम नई थीं! और ये तो बस शुरुआत थी। आगे जो आया, वो और भी कमाल का है।
5:43हवाई जहाज़ से चाँद तक
जब जोनाथन लगभग इकहत्तर साल का था, तब पहला हवाई जहाज़ उड़ा, साल उन्नीस सौ तीन में! वो उड़ान सिर्फ़ कुछ सेकंड की थी, लेकिन इंसान पहली बार इंजन वाले जहाज़ में आसमान में उड़ चुका था। फिर आया रेडियो, फिर टीवी, फिर कंप्यूटर। और जब जोनाथन एक सौ सैंतीस साल का था, तब इंसान ने चाँद पर कदम रखा! और आज? आज एक छोटा-सा फ़ोन वीडियो दिखाता है, गाने बजाता है, और दुनिया भर में बात करवाता है। वाह-तथ्य: ये सारे आविष्कार जोनाथन के जीते-जी हुए! और इस पूरे समय में उसे बस एक ही चीज़ चाहिए थी: अच्छा, स्वादिष्ट खाना! तो चलो देखते हैं, एक सौ चौरानवे साल का कछुआ खाता क्या है?
6:30जोनाथन का खाना
जोनाथन शाकाहारी है। वो घास चरता है, पत्तियाँ खाता है, और उसके सबसे पसंदीदा खाने हैं: खीरा, पत्तागोभी, सेब, केले, गाजर और सलाद के पत्ते! खासकर केला! कहते हैं जोनाथन को केले बहुत पसंद हैं। उसका मुँह इतना बड़ा है कि वो एक बड़ा टुकड़ा एक ही बार में चबा जाता है। क्रंच, क्रंच, क्रंच! हफ़्ते में एक बार, जानवरों के एक डॉक्टर उसे अपने हाथों से खाना खिलाते हैं, ताकि उसे सारे ज़रूरी पोषक तत्व मिलते रहें। ये खाना उसे ताकत और सेहत देता है। वाह-तथ्य: कछुओं के दाँत नहीं होते! उनके मुँह में एक सख़्त, चोंच जैसा किनारा होता है, जिससे वो खाना काटते हैं। लेकिन रुको, इतना बूढ़ा कछुआ इतने लंबे समय तक कैसे टिका रहा? इसका राज़ छिपा है उसके शरीर में।
7:26कवच का राज़
सबसे पहले, उसका कवच! बहुत से बच्चे सोचते हैं कि कछुआ अपने कवच से बाहर निकल सकता है, जैसे हम अपनी जैकेट उतारते हैं। लेकिन नहीं! कछुए का कवच उसकी हड्डियों से बना है। उसकी रीढ़ की हड्डी और पसलियाँ कवच से जुड़ी होती हैं। यानी कवच उसका घर भी है, और उसका शरीर भी! कवच के ऊपर छोटे-छोटे टुकड़े होते हैं, जिन्हें स्क्यूट कहते हैं। ये उसी मज़बूत चीज़ से बने होते हैं जिससे तुम्हारे नाखून बने हैं! वाह-तथ्य: कछुआ अपने कवच पर हल्का-सा छुआ जाना भी महसूस कर सकता है, क्योंकि उसमें नसें होती हैं! पर ये कवच अकेला लंबी उम्र का राज़ नहीं है। असली जादू छिपा है उसकी धीमी रफ़्तार में।
8:14धीमी ज़िंदगी
विशाल कछुओं का शरीर बहुत धीरे-धीरे काम करता है। उनका दिल धीरे धड़कता है, वो धीरे साँस लेते हैं, और खाना भी धीरे-धीरे पचाते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि ये धीमापन उन्हें लंबा जीने में मदद करता है। जैसे धीमी लौ पर जलने वाली मोमबत्ती ज़्यादा देर तक चलती है! कछुए ठंडे खून वाले जानवर हैं। यानी उनका शरीर खुद को अंदर से गरम नहीं रखता। इसलिए जोनाथन को धूप सेंकना बहुत पसंद है। धूप उसकी बैटरी चार्ज करती है! वाह-तथ्य: कुछ विशाल कछुए बिना खाए-पिए कई महीनों तक रह सकते हैं! लेकिन जोनाथन? वो खाना छोड़ने वालों में से बिल्कुल नहीं है। और उम्र के साथ उसकी ज़िंदगी में कुछ दिलचस्प बदलाव भी आए हैं।
9:04बुढ़ापे के साथी
इतनी लंबी उम्र में जोनाथन की आँखें अब ठीक से देख नहीं पातीं, और उसकी सूँघने की ताकत भी कम हो गई है। ठीक वैसे ही, जैसे कई दादा-दादी को चश्मे की ज़रूरत पड़ती है। लेकिन जोनाथन बिल्कुल मस्त है! उसकी सुनने की ताकत बहुत अच्छी है। जब उसका देखभाल करने वाला उसे पुकारता है, तो वो आवाज़ पहचान लेता है। वो अब भी बगीचे में घूमता है, धूप में आराम करता है, और अपने खाने का बेसब्री से इंतज़ार करता है। उसके देखभाल करने वाले उसका बहुत प्यार से ध्यान रखते हैं। वाह-तथ्य: जोनाथन हमें एक प्यारी बात सिखाता है, कि अपने बुज़ुर्गों का ख्याल रखना कितना ज़रूरी है! और जोनाथन के पास एक और खास चीज़ है, जो बहुत कम जानवरों के पास होती है।
9:57पुरानी तस्वीर
जोनाथन की एक बहुत पुरानी काली-सफ़ेद तस्वीर है, जो लगभग एक सौ चालीस साल पहले खींची गई थी! उसमें वो बगीचे में घास पर खड़ा है, और पास में कुछ लोग खड़े हैं। उस समय कैमरे बहुत बड़े और भारी होते थे। फ़ोटो खिंचवाने के लिए लोगों को बिना हिले कुछ देर तक एकदम मूर्ति की तरह खड़े रहना पड़ता था! उस तस्वीर के बाद दुनिया कितनी बदल गई, लेकिन तस्वीर वाला वो कछुआ आज भी उसी बगीचे में घूम रहा है! वाह-तथ्य: ये किसी ज़िंदा ज़मीनी जानवर की सबसे पुरानी तस्वीरों में से एक मानी जाती है! और जोनाथन के नाम एक और बड़ा कारनामा दर्ज है।
10:41विश्व रिकॉर्ड
जोनाथन को दुनिया का सबसे बूढ़ा ज़िंदा ज़मीनी जानवर होने का आधिकारिक विश्व रिकॉर्ड मिला है। और सिर्फ़ इतना ही नहीं! उसे अब तक का सबसे बूढ़ा कछुआ भी माना जाता है, जिसकी उम्र का रिकॉर्ड रखा गया है। उसने पहले के सारे कछुओं के रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए! धीरे चलकर भी सबसे आगे! साल दो हज़ार बत्तीस में जोनाथन लगभग दो सौ साल का हो जाएगा! सोचो, दो सौवें जन्मदिन का केक कितना बड़ा होगा... शायद खीरे और सेब से बना हुआ! वाह-तथ्य: जोनाथन का पक्का जन्मदिन किसी को नहीं पता, इसलिए उसके लिए एक खास दिन चुना गया है, और उस दिन उसे मज़ेदार दावत मिलती है! लेकिन इतनी बड़ी उम्र सुनकर एक सवाल उठता है: बाकी जानवर कितने साल जीते हैं?
11:32कौन कितना जीता है
चलो तुलना करते हैं! एक हैम्स्टर लगभग दो-तीन साल जीता है। एक कुत्ता लगभग बारह से पंद्रह साल। एक हाथी लगभग साठ-सत्तर साल। और एक इंसान? अक्सर सत्तर-अस्सी साल। लेकिन जोनाथन? एक सौ चौरानवे साल, और गिनती अभी भी जारी है! यानी जोनाथन इतने लंबे समय से ज़िंदा है कि उसके जीते-जी इंसानों की सात-आठ पीढ़ियाँ बड़ी हो गईं। दादा, परदादा, उनके दादा... सोचते-सोचते सिर घूम जाए! वाह-तथ्य: समुद्र में कुछ ऐसे जीव भी हैं जो इससे भी ज़्यादा जीते हैं, जैसे कुछ व्हेल और शार्क! लेकिन ज़मीन पर, आज जोनाथन का कोई मुकाबला नहीं। तो चलो, अब सारी कमाल की बातें एक साथ याद करते हैं!
12:22याद करो और खेलो
चलो, जल्दी से याद करते हैं! जोनाथन लगभग एक सौ चौरानवे साल का विशाल कछुआ है, जो अठारह सौ बत्तीस के आसपास अंडे से निकला था। वो टेलीफ़ोन, बिजली के बल्ब और पैडल वाली साइकिल से भी पुराना है! वो सेंट हेलेना नाम के दूर-दराज़ टापू पर एक बगीचे में रहता है। उसका कवच उसकी हड्डियों से बना है, उसका धीमा शरीर उसे लंबा जीने में मदद करता है, और उसे खीरे, सेब और केले बहुत पसंद हैं! अब तुम्हारे लिए एक मज़ेदार चुनौती! आज घर पर अपने दादा-दादी या नाना-नानी से पूछो: जब आप मेरी उम्र के थे, तब कौन-सी चीज़ें नहीं थीं जो आज हैं? फिर एक कागज़ पर एक लंबी लाइन खींचो, और उन चीज़ों को क्रम से लिखकर अपनी खुद की समय-रेखा बनाओ! और खाने की मेज़ पर सबको ये बात बताकर हैरान कर दो: दुनिया में एक कछुआ है जो बिजली के बल्ब से भी पुराना है! याद रखना, धीरे चलने वाले भी बहुत दूर तक जाते हैं। फिर मिलेंगे, एक और कमाल की कहानी के साथ!
अन्य भाषाओं में
- English: Jonathan the 194-Year-Old Tortoise: Older Than the Light Bulb!
- संस्कृतम्: जोनाथनः: १९४ वर्षीयः कच्छपः, दूरवाण्याः अपि पूर्वं जातः!
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शृंखला: science (हिन्दी)