गोल्फ बॉल जितना नीला ऑक्टोपस! वैज्ञानिकों ने खोजी नई प्रजाति
सारांश
गैलापागोस द्वीपों के पास गहरे समुद्र में एक रोबोट ने एक नन्हा, चमकीला नीला ऑक्टोपस देखा, जिसकी भुजाएँ छोटी और गोल-मटोल थीं। इस वीडियो में जानो कि वैज्ञानिकों ने 3D एक्स-रे स्कैन से कैसे पक्का किया कि इस ऑक्टोपस को आज तक किसी ने नाम नहीं दिया था।
पूरा पाठ
0:00नन्हा नीला रहस्य
क्या तुम सोच सकते हो कि एक ऑक्टोपस इतना छोटा हो कि तुम्हारी हथेली पर आराम से बैठ जाए? और वो भी चमकीले नीले रंग का! जी हाँ, समुद्र की गहराई में ऐसा ही एक नन्हा, प्यारा ऑक्टोपस मिला है, जिसका आकार बस एक गोल्फ बॉल जितना है। और सबसे मज़ेदार बात? उसे किसी इंसान ने नहीं, बल्कि एक रोबोट ने ढूँढा! आज हम एक ऐसे सफ़र पर चलेंगे जहाँ सूरज की रोशनी भी नहीं पहुँचती, जहाँ अनोखे जीव रहते हैं, और जहाँ वैज्ञानिक जासूसों की तरह सुराग ढूँढते हैं। तो अपनी सीट की पेटी बाँध लो, क्योंकि हम पानी के अंदर गोता लगाने वाले हैं! लेकिन पहले जानते हैं कि ये नन्हा नीला दोस्त आखिर रहता कहाँ है। उसका घर दुनिया की सबसे अनोखी जगहों में से एक के पास है!
0:53गैलापागोस का जादू
इस जगह का नाम है गैलापागोस द्वीप समूह। ये प्रशांत महासागर में बसे छोटे-छोटे टापुओं का एक झुंड है। ये टापू बहुत-बहुत समय पहले ज्वालामुखियों से बने थे, यानी धरती के अंदर का गरम पिघला पत्थर ऊपर आया और ठंडा होकर ज़मीन बन गया। यहाँ के जानवर भी कमाल के हैं! यहाँ विशाल कछुए रहते हैं जो सौ साल से भी ज़्यादा जी सकते हैं। यहाँ ऐसी छिपकलियाँ भी हैं जो समुद्र में तैरकर पानी के अंदर उगने वाले शैवाल खाती हैं। सोचो, एक छिपकली जो तैराकी चैंपियन हो! और यहाँ एक पक्षी भी है जिसके पैर चमकीले नीले होते हैं, जैसे उसने नीले मोज़े पहन रखे हों! मज़ेदार बात ये है कि ये पक्षी अपने नीले पैर ऊपर-नीचे करके नाचता है। लेकिन असली रहस्य ऊपर नहीं, बल्कि पानी के बहुत, बहुत नीचे छिपा है। चलो, नीचे चलते हैं!
1:58समुद्र की मंज़िलें
समुद्र को एक बहुत ऊँची इमारत की तरह सोचो, लेकिन उल्टी, जो नीचे की तरफ़ जाती है। सबसे ऊपर की मंज़िल है धूप वाला हिस्सा। यहाँ सूरज की रोशनी खूब आती है, पानी गरम रहता है, और रंग-बिरंगी मछलियाँ इधर-उधर तैरती हैं। थोड़ा और नीचे जाओ तो आता है धुंधली रोशनी वाला हिस्सा। यहाँ रोशनी बहुत हल्की हो जाती है, जैसे शाम के वक़्त होती है। और उससे भी नीचे? वहाँ आता है गहरा अंधेरा हिस्सा, जहाँ सूरज की एक किरण भी नहीं पहुँचती। यहाँ का पानी फ्रिज जितना ठंडा होता है! और क्या तुम जानते हो? इतनी गहराई में पानी इतनी ज़ोर से दबाता है, जैसे एक छोटे से सिक्के पर पूरी की पूरी कार रखी हो। इसीलिए इंसान वहाँ आसानी से नहीं जा सकते। तो फिर वैज्ञानिक वहाँ कैसे पहुँचे? उनके पास था एक बहुत ही खास साथी!
2:55रोबोट खोजी
मिलो इस कहानी के हीरो से: पानी के अंदर चलने वाला एक रोबोट! इसे एक बड़े जहाज़ से लंबी, मज़बूत तार के सहारे समुद्र में उतारा जाता है। जहाज़ पर बैठे वैज्ञानिक इसे वैसे ही चलाते हैं, जैसे तुम कोई खिलौना गाड़ी रिमोट से चलाते हो। इस रोबोट के पास तेज़ रोशनी वाली बत्तियाँ हैं, जो अंधेरे पानी को जगमगा देती हैं। इसके पास बढ़िया कैमरे हैं, जो हर छोटी चीज़ की साफ़ तस्वीर खींचते हैं। और इसके पास रोबोटिक हाथ भी हैं, जो बहुत नाज़ुक चीज़ों को भी धीरे से पकड़ सकते हैं। सबसे कमाल की बात: ये रोबोट घंटों तक पानी के अंदर काम कर सकता है, और उसे थकान भी नहीं होती! न उसे भूख लगती है, न नींद आती है। जहाज़ पर वैज्ञानिक बड़ी-बड़ी स्क्रीनों पर सब कुछ लाइव देखते हैं। एक दिन, जब रोबोट गैलापागोस के पास गहरे समुद्र की तली पर घूम रहा था, स्क्रीन पर कुछ नीला सा चमका। सब वैज्ञानिक अपनी कुर्सी से उछल पड़े! आखिर वो था क्या?
4:05नीला ऑक्टोपस मिला
वो था एक बहुत ही छोटा ऑक्टोपस! इतना छोटा कि वो एक गोल्फ बॉल जितना ही था। और उसका रंग? चमकदार, खूबसूरत नीला, जैसे किसी ने समुद्र की तली पर एक नीला कंचा रख दिया हो। वैज्ञानिकों ने कैमरा ज़ूम करके देखा। उसकी भुजाएँ लंबी और लहराती नहीं थीं, जैसी आमतौर पर ऑक्टोपस की होती हैं। बल्कि उसकी भुजाएँ छोटी, मोटी और गोल-मटोल थीं, जैसे नन्ही-नन्ही गाजरें! और ये जान लो: गहरे समुद्र के बहुत से जीवों को आज तक किसी इंसान ने अपनी आँखों से नहीं देखा है। इसलिए जब भी कोई रोबोट वहाँ जाता है, तो उसे कुछ नया दिखने की पूरी संभावना होती है। वैज्ञानिकों के मन में एक बड़ा सवाल आया: क्या ये कोई ऐसा ऑक्टोपस है जिसे हम पहले से जानते हैं, या बिल्कुल नया? पर जवाब ढूँढने से पहले, चलो इस नन्हे दोस्त को ज़रा करीब से देखते हैं!
5:00करीब से देखो
चलो इस नीले ऑक्टोपस की एक तस्वीर बनाते हैं। सबसे ऊपर है उसका गोल, नरम सिर, जो असल में उसका शरीर है। ऑक्टोपस का सिर और शरीर एक ही गोल थैली जैसा होता है, और उसी के अंदर उसके सारे ज़रूरी अंग होते हैं। उसके नीचे हैं आठ भुजाएँ। हमारे नीले दोस्त की भुजाएँ छोटी और मोटी हैं, इसलिए वो एक नन्हे से छाते जैसा दिखता है। हर भुजा के नीचे गोल-गोल चूसक लगे होते हैं, जो छोटे-छोटे कपों जैसे दिखते हैं। और उसकी दो बड़ी-बड़ी आँखें, जो अंधेरे में भी हल्की से हल्की रोशनी पकड़ लेती हैं। अब एक कमाल की बात: ऑक्टोपस के चूसक सिर्फ़ चीज़ें पकड़ते ही नहीं, बल्कि छूकर स्वाद भी ले सकते हैं! सोचो, अगर तुम अपनी उँगलियों से आइसक्रीम का स्वाद ले पाते! लेकिन रुको, ऑक्टोपस के अंदर ऐसे राज़ छिपे हैं जो तुम्हें हैरान कर देंगे। क्या तुम जानते हो कि ऑक्टोपस के कितने दिल होते हैं?
6:02तीन दिल, नीला खून
तीन! जी हाँ, एक ऑक्टोपस के तीन दिल होते हैं। दो छोटे दिल खून को उसके गलफड़ों तक पहुँचाते हैं, जहाँ से उसे पानी में घुली हवा मिलती है। और एक बड़ा दिल खून को पूरे शरीर में भेजता है। और उसका खून? वो लाल नहीं, नीला होता है! हमारे खून में लोहा होता है जो उसे लाल बनाता है, लेकिन ऑक्टोपस के खून में ताँबा होता है, जो उसे नीला बना देता है। ठंडे पानी में ये ताँबे वाला खून बहुत अच्छे से काम करता है। और सुनो: ऑक्टोपस के शरीर में एक भी हड्डी नहीं होती! इसलिए वो अपने शरीर को इतना मोड़ सकता है कि बहुत छोटी सी जगह से भी निकल जाए। उसके शरीर में सबसे सख्त चीज़ है एक छोटी सी चोंच, जो तोते की चोंच जैसी दिखती है। ये चोंच बहुत काम की है, और बाद में ये हमारी जासूसी कहानी में एक बड़ा सुराग बनेगी! पर पहले, ये समझते हैं कि वैज्ञानिक कैसे तय करते हैं कि कोई जीव नया है या पुराना।
7:09नया या पुराना?
दुनिया में ऑक्टोपस की तीन सौ से भी ज़्यादा किस्में हैं। हर किस्म को एक प्रजाति कहते हैं। जैसे बिल्ली और शेर दोनों एक ही परिवार के हैं, लेकिन अलग-अलग प्रजातियाँ हैं, वैसे ही ऑक्टोपस परिवार में भी बहुत सारी अलग-अलग प्रजातियाँ हैं। जब वैज्ञानिक किसी नई प्रजाति को ढूँढते हैं, तो वो उसे एक खास नाम देते हैं और उसके बारे में सब कुछ लिखकर दुनिया के साथ बाँटते हैं। लेकिन नाम देने से पहले उन्हें पक्का करना पड़ता है कि ये प्रजाति सच में नई है। ये बिल्कुल वैसा है जैसे 'अंतर ढूँढो' वाला खेल! वैज्ञानिक नए ऑक्टोपस को उन सभी ऑक्टोपसों से मिलाते हैं जिनके बारे में पहले से पता है। भुजाओं की लंबाई, चूसकों की गिनती, चोंच का आकार, सब कुछ। एक मज़ेदार बात: सिर्फ़ रंग देखकर कोई प्रजाति नई साबित नहीं होती, क्योंकि कई ऑक्टोपस अपना रंग बदल सकते हैं! इसलिए वैज्ञानिकों को उसके अंदर झाँकना था। पर बिना उसे नुकसान पहुँचाए अंदर कैसे देखें? इसके लिए उन्हें जाना पड़ा प्रयोगशाला में!
8:21प्रयोगशाला में
रोबोट ने अपने नाज़ुक हाथों से बड़ी सावधानी से एक नन्हे नीले ऑक्टोपस को एक खास डिब्बे में रखा, और उसे जहाज़ तक लाया गया। फिर उसे सावधानी से प्रयोगशाला ले जाया गया। प्रयोगशाला एक ऐसी जगह है जहाँ वैज्ञानिक चीज़ों को ध्यान से जाँचते हैं। वहाँ माइक्रोस्कोप होते हैं, जो छोटी चीज़ों को बहुत बड़ा करके दिखाते हैं। वहाँ कंप्यूटर होते हैं, और ढेर सारी नोटबुक्स, जिनमें वैज्ञानिक हर बात लिखते हैं। क्या तुम जानते हो? एक नई प्रजाति को पक्का करने में कभी-कभी कई महीने, यहाँ तक कि कई साल भी लग जाते हैं! वैज्ञानिक बहुत धैर्य रखते हैं और हर बात को बार-बार जाँचते हैं। और इस बार उनके पास एक सुपर-मशीन थी, जो किसी जादू से कम नहीं। एक ऐसी मशीन जो चीज़ों के आर-पार देख सकती है! अंदाज़ा लगाओ, वो क्या थी?
9:15जादुई 3D स्कैन
वो थी एक 3D एक्स-रे स्कैन मशीन! तुमने शायद अस्पताल में एक्स-रे के बारे में सुना होगा। जब किसी की हड्डी में चोट लगती है, तो डॉक्टर एक्स-रे से हड्डी की फोटो लेते हैं, बिना त्वचा को खोले। आम एक्स-रे एक सपाट तस्वीर देता है, जैसे कागज़ पर बनी ड्रॉइंग। लेकिन 3D स्कैन मशीन चीज़ के चारों ओर घूम-घूमकर सैकड़ों तस्वीरें लेती है, ऊपर से, नीचे से, दाएँ से, बाएँ से। फिर कंप्यूटर उन सभी तस्वीरों को जोड़कर एक पूरा 3D मॉडल बना देता है, बिल्कुल वैसे जैसे तुम छोटे-छोटे टुकड़े जोड़कर कोई पहेली पूरी करते हो। अब वैज्ञानिक उस मॉडल को स्क्रीन पर घुमा सकते हैं, बड़ा कर सकते हैं, और परत-दर-परत उसके अंदर झाँक सकते हैं। सबसे शानदार बात: ये स्कैन इतना बारीक होता है कि इसमें बाल से भी पतली चीज़ें दिख जाती हैं! और इसके लिए ऑक्टोपस को काटना या खोलना नहीं पड़ता। तो जब वैज्ञानिकों ने नीले ऑक्टोपस को स्कैन किया, तो उन्हें क्या दिखा? चलो देखते हैं!
10:26स्कैन के सुराग
स्क्रीन पर नन्हा ऑक्टोपस धीरे-धीरे घूम रहा था, और उसके अंदर की हर चीज़ साफ़ दिख रही थी। सबसे पहले वैज्ञानिकों ने उसकी चोंच को देखा। याद है वो तोते जैसी चोंच? उसका आकार और बनावट हर प्रजाति में थोड़ी अलग होती है, जैसे हर इंसान की उँगलियों के निशान अलग होते हैं। फिर उन्होंने उसकी छोटी-मोटी भुजाओं को नापा, और चूसकों को एक-एक करके गिना। उन्होंने उसके दिलों, गलफड़ों और दूसरे अंगों का आकार भी देखा। एक और अनोखी बात: ऑक्टोपस के मुँह के अंदर एक छोटी सी जीभ जैसी चीज़ होती है, जिस पर नन्हे-नन्हे दाँतों जैसे काँटे होते हैं। इसे रेडुला कहते हैं, और ये भी हर प्रजाति में अलग दिखती है! अब वैज्ञानिकों के पास ढेर सारे सुराग थे। लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी थी: इन सुरागों को दुनिया के बाकी सभी ऑक्टोपसों से मिलाना!
11:27बड़ा मिलान
वैज्ञानिकों ने संग्रहालयों में रखे पुराने नमूनों को देखा। दुनिया भर के संग्रहालयों में हज़ारों समुद्री जीव संभालकर रखे गए हैं, ताकि वैज्ञानिक उनसे सीख सकें। उन्होंने मोटी-मोटी किताबें और पुराने शोध पत्र पढ़े, जिनमें सौ साल से भी पुराने ऑक्टोपसों का ज़िक्र था। उन्होंने कंप्यूटर पर दूसरे वैज्ञानिकों की तस्वीरों और जानकारी से भी मिलान किया। हर बार वो पूछते: क्या इसकी चोंच ऐसी है? क्या इसकी भुजाएँ इतनी छोटी हैं? क्या ये इतनी गहराई में रहता है? और हर बार जवाब आता: नहीं, ये उससे अलग है! और फिर आया बड़ा पल: ये नन्हा ऑक्टोपस किसी भी जानी-पहचानी प्रजाति से पूरी तरह मेल नहीं खाता था! इसका मतलब था कि आज तक किसी ने भी इसे नाम नहीं दिया था। वैज्ञानिक खुशी से झूम उठे! पर अब एक बहुत मज़ेदार काम बाकी था...
12:29नया नाम मिला
नाम रखना! जब कोई नई प्रजाति मिलती है, तो वैज्ञानिक उसे एक खास वैज्ञानिक नाम देते हैं। ये नाम अक्सर लैटिन या ग्रीक भाषा के शब्दों से बनता है, और पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इसी नाम का इस्तेमाल करते हैं। कभी-कभी नाम जीव के रंग पर रखा जाता है, कभी उस जगह पर जहाँ वो मिला, और कभी किसी खास इंसान के सम्मान में। फिर वैज्ञानिक एक रिपोर्ट लिखते हैं, जिसमें नई प्रजाति की हर बात होती है: उसका आकार, रंग, घर, और स्कैन की तस्वीरें। दूसरे विशेषज्ञ उस रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ते और जाँचते हैं। जब सब मान जाते हैं, तब जाकर नई प्रजाति आधिकारिक रूप से दुनिया की किताबों में दर्ज होती है! क्या तुम जानते हो? हर साल वैज्ञानिक हज़ारों नई प्रजातियों को नाम देते हैं, कीड़ों से लेकर पौधों तक! लेकिन ये नीला ऑक्टोपस इतना खास क्यों है? क्योंकि वो हमें गहरे समुद्र के बारे में कुछ बहुत बड़ा बताता है।
13:33अनदेखा समुद्र
हमारी धरती का ज़्यादातर हिस्सा पानी से ढका है, और उस पानी का ज़्यादातर हिस्सा गहरा, अंधेरा समुद्र है। लेकिन क्या तुम जानते हो कि इंसानों ने गहरे समुद्र का बस एक बहुत छोटा सा हिस्सा ही करीब से देखा है? कुछ लोग तो कहते हैं कि हम अपने समुद्र की तली से ज़्यादा चाँद की सतह के बारे में जानते हैं! इसका मतलब है कि वहाँ नीचे अभी भी न जाने कितने नन्हे नीले ऑक्टोपस, चमकने वाली मछलियाँ और अनोखे जीव हमारा इंतज़ार कर रहे हैं। जब हम जानते हैं कि वहाँ कौन-कौन रहता है, तो हम उनके घर की बेहतर देखभाल कर सकते हैं। हर नई खोज हमें सिखाती है कि हमारा समुद्र कितना कीमती है। और कौन जाने, शायद अगला नया जीव तुम ही ढूँढो! तो चलो, एक बार फिर याद करते हैं कि आज हमने क्या-क्या सीखा।
14:30याद करो और खेलो
हमने सीखा कि गैलापागोस द्वीपों के पास, गहरे समुद्र में, एक रोबोट ने गोल्फ बॉल जितना छोटा, चमकीला नीला ऑक्टोपस ढूँढा, जिसकी भुजाएँ छोटी और गोल-मटोल थीं। हमने जाना कि ऑक्टोपस के तीन दिल होते हैं, नीला खून होता है, और शरीर में एक भी हड्डी नहीं होती। और हमने देखा कि कैसे वैज्ञानिकों ने 3D एक्स-रे स्कैन से उसके अंदर झाँका, उसकी चोंच और भुजाओं को जासूसों की तरह जाँचा, और पक्का किया कि इसे आज तक किसी ने नाम नहीं दिया था! अब तुम्हारे लिए एक मज़ेदार चुनौती! एक कागज़ और कुछ रंग लो, और अपना खुद का एक गहरे समुद्र का जीव बनाओ। उसके कितने हाथ हैं? उसका रंग क्या है? क्या वो अंधेरे में चमकता है? फिर उसे एक मज़ेदार नाम दो, बिल्कुल एक असली वैज्ञानिक की तरह! और आज रात खाने पर अपने परिवार से पूछना: बताओ, ऑक्टोपस के कितने दिल होते हैं? जब वो सोच में पड़ जाएँ, तो तुम मुस्कुराकर कहना: तीन! तब तक के लिए, जिज्ञासु बने रहो और खोज करते रहो। फिर मिलेंगे एक नए रोमांच पर। टाटा!
अन्य भाषाओं में
- English: The Tiny Blue Octopus Nobody Had Ever Named!
- संस्कृतम्: गभीरसमुद्रस्य लघुः नीलः अष्टपादः: सर्वथा नूतना जातिः!
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