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गुब्बारे वाली रेस कार: हवा पीछे, तो कार आगे क्यों भागती है?

2026-10-30 · YouTube पर देखें

सारांश

एक बोतल, कुछ स्ट्रॉ और एक गुब्बारा, और आपकी अपनी रेस कार तैयार! इस वीडियो में हम जासूसों की तरह सुराग जोड़कर पता लगाते हैं कि हवा पीछे निकलती है तो कार आगे क्यों भागती है।

पूरा पाठ

0:00गुब्बारे की पहेली

0:00क्या आप जानते हैं? एक मामूली-सा गुब्बारा... आपकी खिलौना कार दौड़ा सकता है! न बैटरी, न चाबी। 0:10सच में! गुब्बारा फुलाओ, छोड़ो, और ज़ूऊऊम! कार फ़र्श पर फ़र्राटे से भागती है। पर यहाँ एक अजीब पहेली है। 0:21हवा तो पीछे निकलती है... फिर कार आगे क्यों भागती है? उल्टी क्यों नहीं? आज हम मिलकर ये राज़ सुलझाएँगे। 0:32जासूसों की तरह, एक-एक सुराग से। और सबसे मज़ेदार बात? अपनी कार आप खुद बनाएँगे! पर पहले देखिए, चीज़ें कितनी कम चाहिए...

0:44सामान की सूची

0:44तो चाहिए क्या? एक खाली प्लास्टिक की बोतल। यही है कार का शरीर। बोतल के चार ढक्कन, ये बनेंगे पहिए। 0:56दो लकड़ी की सींकें, जो पहियों को जोड़ेंगी। कुछ स्ट्रॉ, थोड़ा-सा टेप। और हमारा हीरो... एक गुब्बारा! 1:06वाह, कितनी सस्ती रेसिंग कार! और पता है? गुब्बारे की रबर बड़ी लचीली होती है। वो खिंचकर कई गुना बड़ी हो जाती है। 1:18यही खिंचाव उसमें ताक़त भरता है। अब सारा सामान तैयार है। पर इन टुकड़ों से कार बनेगी कैसे? चलो, एक-एक कदम जोड़ते हैं!

1:31कार बनाइए

1:31पहला कदम। दो स्ट्रॉ लो, और बोतल के नीचे आड़े चिपका दो। ये हैं पहियों के घर। दूसरा कदम। 1:42किसी बड़े से हर ढक्कन में छोटा-सा छेद करवाओ। सींक को स्ट्रॉ के अंदर से निकालो। फिर दोनों सिरों पर ढक्कन लगा दो। ध्यान रहे, सींक की नुकीली नोक हमेशा बड़े ही काटें या ढकें। 1:58तीसरा कदम। एक स्ट्रॉ के सिरे पर गुब्बारे का मुँह कसकर टेप करो। उसे बोतल पर ऐसे चिपकाओ, कि स्ट्रॉ पीछे की ओर झाँके। बस! 2:12आपकी कार तैयार है। अब आता है सबसे रोमांचक पल... पहली उड़ान! अरे नहीं, मेरा मतलब, पहली दौड़!

2:21पहली दौड़

2:21स्ट्रॉ से फूँक मारो, गुब्बारा फुलाओ। स्ट्रॉ का सिरा उँगली से दबा लो। कार ज़मीन पर रखो... तीन, दो, एक, छोड़ो! 2:32फ़्स्स्स्स्स! कार सर्र से आगे भागती है! पहला सुराग मिल गया। हवा तेज़ी से पीछे निकल रही है। 2:43और कार ठीक उल्टी दिशा में जा रही है। और हैरानी की बात सुनो। गुब्बारे के अंदर की हवा, बाहर की हवा से ज़्यादा दबी होती है। इसलिए छूटते ही वो बाहर भागती है। 2:58पर रुको। क्या ये हवा पीछे फ़र्श को धक्का दे रही है? या पीछे की हवा को? चलो, एक चालाक परीक्षण करते हैं।

3:09उड़ता गुब्बारा

3:09एक गुब्बारा फुलाओ। उसका मुँह बिना बाँधे पकड़ो। और छोड़ दो! फुर्र्र! 3:19वो पूरे कमरे में इधर-उधर उड़ता है। बिल्कुल किसी पगलाई मक्खी जैसा! अब ध्यान से सोचो। उड़ते गुब्बारे के पीछे न कोई फ़र्श है, न कोई दीवार। 3:33फिर भी वो आगे भागता है। ये रहा दूसरा सुराग। गुब्बारे को किसी चीज़ से टकराने की ज़रूरत ही नहीं! तो फिर ये धक्का आ कहाँ से रहा है? 3:47इसका जवाब छिपा है... एक बहुत पुराने, बहुत मशहूर नियम में।

3:51न्यूटन का नियम

3:51तीन सौ साल से भी पहले की बात है। आइज़क न्यूटन नाम के एक वैज्ञानिक थे। उन्होंने एक नियम लिखा। हर धक्के के बदले, बराबर का धक्का उल्टी दिशा में मिलता है। 4:07यही है तीसरा सुराग! इसे खुद महसूस करो। हथेली से दीवार को धीरे से दबाओ। लगता है न, जैसे दीवार भी हाथ को वापस दबा रही है? 4:21और सच में दबा रही है! जितना ज़ोर से तुम धकेलोगे, दीवार भी उतने ही ज़ोर से धकेलेगी। पर हमारी कार में तो कोई दीवार है ही नहीं... तो वहाँ धक्का कौन दे रहा है? 4:35और किसे?

4:37नन्हा रॉकेट

4:37और ये रहा असली राज़! गुब्बारे की खिंची रबर, अंदर की हवा को निचोड़ती है। और उसे स्ट्रॉ से पीछे धकेलती है। अब न्यूटन का नियम कहता है, वो हवा भी गुब्बारे को उतने ही ज़ोर से आगे धकेलती है! 4:55यानी कार को धक्का फ़र्श नहीं दे रहा। कमरे की हवा भी नहीं। धक्का दे रही है वही हवा, जिसे कार खुद पीछे फेंक रही है! और अब सबसे बड़ी हैरानी... 5:09असली रॉकेट भी ठीक ऐसे ही उड़ते हैं! अंतरिक्ष में तो धकेलने को हवा तक नहीं होती। फिर भी रॉकेट आगे बढ़ते हैं, अपनी गैस पीछे फेंककर। तुम्हारी बोतल-कार असल में एक नन्हा रॉकेट है, पहियों वाला! 5:26तो इस रॉकेट को और तेज़ कैसे बनाएँ?

5:30बड़ा गुब्बारा

5:30चलो, वैज्ञानिक बनकर परीक्षण करते हैं! पहले एक छोटा गुब्बारा, थोड़ी-सी हवा। कार थोड़ी दूर जाकर थक जाती है। अब बड़ा गुब्बारा, ढेर सारी हवा! 5:45इस बार कार और दूर तक फ़र्राटे से भागती है। क्यों भला? ज़्यादा हवा, मतलब ज़्यादा देर तक हवा पीछे फेंकी जाएगी। और ज़्यादा देर तक आगे का धक्का मिलेगा। 6:00एक मज़ेदार सुझाव। हर बार फ़र्श पर टेप से निशान लगाओ। ताकि पता चले, कौन कितनी दूर गया। पर एक और तरकीब है। 6:12इसमें गुब्बारा बदलना ही नहीं पड़ता...

6:15हल्की कार

6:15कार को हल्का करो! भारी, बड़ी बोतल हटाओ। छोटी, पतली बोतल लगाओ। फ़ालतू टेप भी निकाल दो। 6:26फिर वही गुब्बारा, वही हवा... और ज़ूम! हल्की कार कहीं ज़्यादा तेज़ भागती है। ऐसा क्यों? 6:36धक्का तो उतना ही है। पर अब उसे कम वज़न आगे बढ़ाना है। सोचो ज़रा, खाली खिलौना-गाड़ी धकेलना आसान है? या किताबों से भरी गाड़ी? 6:50इसीलिए असली रॉकेट बनाने वाले भी, हर फ़ालतू चीज़ हटा देते हैं। वो रॉकेट को हल्का रखने की कोशिश करते हैं। तो अब बताओ, क्या हमारी पहेली पूरी सुलझ गई?

7:03पहेली सुलझी

7:03तो याद है हमारी पहेली? हवा पीछे, कार आगे... क्यों? क्योंकि गुब्बारा हवा को पीछे धकेलता है। 7:13और हवा उतने ही ज़ोर से, गुब्बारे को आगे धकेलती है। अब एक तेज़ उल्टी गिनती! नंबर तीन। बड़ा गुब्बारा ज़्यादा देर धक्का देता है। 7:27और हल्की कार ज़्यादा तेज़ भागती है। नंबर दो। न्यूटन का नियम तीन सौ साल से भी पुराना है। और गुब्बारे को धक्के के लिए, न फ़र्श चाहिए, न दीवार। 7:41और नंबर एक... वो छोटी-सी बोतल-कार असल में एक नन्हा रॉकेट है! जो अंतरिक्ष के रॉकेटों वाली चाल से ही, ज़ूऊऊम करता है!

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