भालू पूरी सर्दी बिना खाए कैसे सोता है? चर्बी के भंडार का राज़!
सारांश
अलास्का का भूरा भालू लगभग आधे साल तक न कुछ खाता है, न पानी पीता है, फिर भी बसंत में आराम से जाग जाता है! इस वीडियो में सुराग-दर-सुराग जानिए कि उसका चर्बी का भंडार कैसे एक खाने के डिब्बे और पानी की बोतल, दोनों का काम करता है।
पूरा पाठ
0:00आधे साल की पहेली
0:00एक जानवर है... जो लगभग आधे साल तक कुछ नहीं खाता। पानी का एक घूँट भी नहीं पीता! फिर भी, बसंत आते ही वो आराम से जाग जाता है। 0:13और बाहर निकल आता है! ये है अलास्का का भूरा भालू। पर एक बात याद रखिए। ये सिर्फ़ भालू की ख़ास ताकत है। 0:25हम इंसानों को तो रोज़ खाना और पानी चाहिए। तभी तो हम खेल पाते हैं, पढ़ पाते हैं! तो सवाल ये है... भालू ये करता कैसे है? 0:36चलिए, इस राज़ को सुलझाते हैं। एक-एक सुराग से। और पहला सुराग छिपा है... एक बड़ी मज़ेदार प्रतियोगिता में!
0:46भालुओं का मुक़ाबला
0:46अलास्का में एक नेशनल पार्क है। वहाँ हर साल, पतझड़ में, एक अनोखा मुक़ाबला होता है। दुनिया भर के लोग ऑनलाइन वोट देते हैं। वो चुनते हैं कि किस भालू ने सर्दी की सबसे बढ़िया तैयारी की। 1:04इसमें कोई दौड़ नहीं होती। कोई ऊँची कूद भी नहीं! जीतता वो है... जिसने अपने शरीर में सबसे बड़ा चर्बी का भंडार जमा किया हो! 1:16और एक मज़ेदार बात सुनिए। नदी के किनारे लाइव कैमरे लगे हैं। उनसे लोग घर बैठे इन भालुओं को देखते हैं। पर रुकिए... 1:28भंडार जमा करना जीत क्यों है? ये जानने के लिए, चलिए नदी के किनारे।
1:34गर्मियों की दावत
1:34गर्मियों में अलास्का की नदियों में कमाल का नज़ारा दिखता है। लाखों सैल्मन मछलियाँ धारा की उलटी तरफ़ तैरती हैं। वो ऊपर की ओर आती हैं। छोटे-छोटे झरनों पर भी उछलकर चढ़ जाती हैं! 1:51भालुओं के लिए ये मौसम... एक बड़ी दावत जैसा है। वो धीरज से नदी में खड़े रहते हैं। और मछलियाँ खाते हैं। 2:02पहाड़ियों पर मीठी जंगली बेरियाँ भी चुनते हैं। और पता है? पतझड़ आते-आते भालू ख़ूब खा लेते हैं। इतना, कि उनकी खाल के नीचे चर्बी की परत बन जाती है। 2:17एक गद्देदार परत! पर ये सारा खाना आख़िर जाता कहाँ है? चलिए, भालू के अंदर झाँकते हैं!
2:26ऊर्जा का टिफ़िन
2:26भालू की खाल के ठीक नीचे... वही गद्देदार चर्बी की परत होती है। इसे ऊर्जा का भंडार समझिए। बिल्कुल एक भरे हुए टिफ़िन की तरह! 2:39भालू इसे हर जगह अपने साथ लेकर चलता है। जो खाना भालू अभी काम में नहीं लेता, शरीर उसे बचा लेता है। और इसी भंडार में रख देता है। बाद में, जब खाना मिलेगा ही नहीं... 2:55तब यही काम आएगा। एक और मज़ेदार बात! ये परत गरम कंबल का काम भी करती है। कड़ाके की ठंड को बाहर ही रोक देती है। 3:08पर भालू इतनी तैयारी क्यों करता है? क्योंकि बाहर कुछ बहुत बड़ा बदलने वाला है!
3:15सर्दी और माँद
3:15सर्दी आती है, और अलास्का बर्फ़ की सफ़ेद चादर ओढ़ लेता है। नदियाँ जम जाती हैं। बेरियाँ ख़त्म हो जाती हैं। खाना ढूँढना लगभग नामुमकिन हो जाता है। 3:30तो भालू एक समझदारी वाला फ़ैसला लेता है। खाना नहीं है? तो चलो... सो जाते हैं! 3:39वो पहाड़ी की ढलान पर एक आरामदायक जगह बनाता है। गुफ़ा जैसी जगह, जिसे माँद कहते हैं। और सुनिए! भालू कई महीनों तक अपनी माँद में रहता है। 3:54कभी-कभी तो लगभग आधे साल तक! पर इतने दिन बिना खाए शरीर चलेगा कैसे? अगला सुराग छिपा है... भालू के दिल में।
4:05धीमा इंजन
4:05माँद में भालू का शरीर धीमा पड़ जाता है। जैसे कोई धीमी रफ़्तार वाला मोड चालू हो गया हो। उसका दिल बहुत धीरे-धीरे धड़कने लगता है। साँसें भी लंबी और हल्की हो जाती हैं। 4:22अब दो भालुओं को साथ-साथ सोचिए। एक जागता हुआ, एक सर्दी में सोता हुआ। जागते भालू का शरीर तेज़ दौड़ने वाले इंजन जैसा है। सोते भालू का शरीर धीमे, बचत वाले इंजन जैसा। 4:39और पता है? इस धीमे मोड में भालू बहुत कम ऊर्जा ख़र्च करता है। इसलिए उसका भंडार धीरे-धीरे ही ख़ाली होता है। पर रुकिए, एक बड़ी पहेली अभी बाकी है... 4:53पानी! भालू पूरी सर्दी पानी भी तो नहीं पीता!
4:58चर्बी से पानी
4:58और यहीं छिपा है सबसे बड़ा राज़! भालू का शरीर चर्बी को ऊर्जा में बदलता है। और तब थोड़ा-सा पानी भी बनता है। हाँ, सच में! 5:11चर्बी से पानी! यानी वो चर्बी का भंडार सिर्फ़ टिफ़िन नहीं है। वो तो एक जादुई डिब्बा है! एक तरफ़ खाना, दूसरी तरफ़ पानी की बोतल। 5:24दोनों साथ-साथ पैक! चलिए, कदम-कदम समझते हैं। कदम एक: चर्बी धीरे-धीरे टूटती है। कदम दो: उससे ऊर्जा मिलती है। 5:36ये ऊर्जा दिल और पूरे शरीर को चलाती है। कदम तीन: साथ में पानी बनता है। ये पानी शरीर की प्यास बुझाता है। अब ज़रा पीछे सोचिए। 5:50वो मुक़ाबला असल में क्या देख रहा था? कि किस भालू ने सबसे बड़ा डिब्बा पैक किया है। खाने और पानी वाला डिब्बा! पर भालू खाना चर्बी के रूप में ही क्यों रखता है?
6:04चर्बी ही क्यों?
6:04क्योंकि चर्बी ऊर्जा को बहुत कसकर रखती है। कम जगह में, भर-भरकर। जैसे ठसाठस पैक किया हुआ सूटकेस! अब बराबर वज़न लीजिए... 6:17थोड़ी चर्बी, और उतनी ही मीठी चीनी। चर्बी में दोगुने से भी ज़्यादा ऊर्जा होती है! और एक कमाल की बात सुनिए। भालू इतने महीने लेटा रहता है। 6:32फिर भी उसकी मांसपेशियाँ और हड्डियाँ काफ़ी हद तक मज़बूत रहती हैं। वैज्ञानिक इस कमाल को समझना चाहते हैं। इसलिए वो भालुओं का ध्यान से अध्ययन कर रहे हैं। और फिर... 6:47आता है बसंत!
6:48बसंत में जागना
6:48बसंत में बर्फ़ पिघलने लगती है। और भालू धीरे-धीरे अपनी माँद से बाहर निकलता है। उसका भंडार अब काफ़ी ख़ाली हो चुका है। क्योंकि पूरी सर्दी उसने उसी से काम चलाया। 7:05अब भालू हरी घास खाता है, नई कोंपलें खाता है। और फिर से ताकत जुटाता है। जल्द ही नदियों में मछलियाँ भी लौट आएँगी। और पता है? 7:18ये पूरा चक्कर हर साल दोहराया जाता है। गर्मी में भंडार भरना... सर्दी में उसे इस्तेमाल करना! तो क्या अब आप हमारी पहेली सुलझा सकते हैं?
7:31राज़ खुल गया
7:31तो याद है हमारा पहला सवाल? भालू लगभग आधे साल बिना खाए-पिए कैसे रहता है? जवाब ये है... उसका चर्बी का भंडार उसे ऊर्जा भी देता है, और पानी भी। 7:46और उसका धीमा शरीर उसे बड़ी किफ़ायत से ख़र्च करता है। अब आपके लिए एक काम! कल बाहर या स्कूल में, एक नन्हा जीव ढूँढिए। ऐसा जीव, जो खाना जुटा रहा हो। 8:01पर उसे दूर से ही देखिए। जैसे दाने ढोती चींटियों की कतार। या दाना चुगती कोई चिड़िया। फिर ध्यान से देखिए। 8:13क्या वो खाना वहीं खा रहा है? या उसे कहीं लेकर जा रहा है? चींटियाँ अपना खाना बिल में ले जाती हैं। पर भालू? 8:24वो अपना पूरा भंडार अपने शरीर में साथ लेकर चलता है!
अन्य भाषाओं में
- English: Backpack the Bear Champion: How Bears Sleep All Winter Without Eating
- संस्कृतम्: स्थूलः ऋक्षः विजेता! बैक्पैक् शीतकाले भोजनं विना कथं स्वपिति?
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शृंखला: science (हिन्दी)