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क्या एवरेस्ट से भी ऊँचा है यह छिपा हुआ पहाड़?

2026-09-19 · YouTube पर देखें

सारांश

हम समुद्र की सतह से नहीं, बल्कि समुद्र की असली तली से पहाड़ों को नापेंगे। जानिए कैसे हवाई का मौना केआ पानी के नीचे छिपे अपने हिस्से सहित एवरेस्ट से भी ऊँचा निकलता है।

पूरा पाठ

0:00छिपे पहाड़ का रहस्य

क्या आपको पता है कि एक पहाड़, अपनी असली नींव से नापा जाए, तो एवरेस्ट से भी ऊँचा हो सकता है? उसका आधे से ज़्यादा हिस्सा समुद्र के नीचे छिपा है, इसलिए पहली नज़र में वह छोटा लगता है। आज हम हवाई के मौना केआ की गुप्त ऊँचाई खोजेंगे। लेकिन पहले सोचिए: पहाड़ की शुरुआत कहाँ से मानी जानी चाहिए? समुद्र की सतह से, या उस चट्टानी जगह से जहाँ वह सचमुच उगना शुरू हुआ? यही छोटा-सा सवाल हमारी पूरी यात्रा को बदल देगा। और हाँ, इस सफर में हमें पानी के नीचे भी जाना पड़ेगा, इसलिए अपनी कल्पना की पनडुब्बी तैयार रखिए। सबसे बड़ा मापने वाला रहस्य अब शुरू होता है।

0:46ऊँचाई कैसे नापें

सबसे पहले, ऊँचाई नापने के दो तरीकों को समझते हैं। आम तौर पर दुनिया के पहाड़ों की ऊँचाई समुद्र की औसत सतह से मापी जाती है। इसे ऐसे समझिए जैसे धरती पर एक बहुत लंबी, सीधी शून्य-रेखा खींच दी गई हो। उस रेखा से ऊपर की दूरी ही पहाड़ की ऊँचाई कहलाती है। इसी तरीके से माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई लगभग 8,849 मीटर है। यानी लगभग नौ किलोमीटर! यह दूरी इतनी बड़ी है कि अगर आप सीढ़ियों से चढ़ते, तो सीढ़ियाँ खत्म होने का नाम ही नहीं लेतीं। मगर समुद्र की सतह पहाड़ की असली जड़ नहीं होती। कई पहाड़ समुद्र के नीचे की चट्टान पर टिके होते हैं। अब आइए देखें कि मौना केआ किस जगह से ऊपर उठता है।

1:42मौना केआ से मुलाकात

मौना केआ हवाई द्वीप पर खड़ा एक विशाल ज्वालामुखी पर्वत है। आज यह शांत है, और इसके शिखर पर दूरबीनें भी दिखाई देती हैं। समुद्र की सतह से इसकी ऊँचाई लगभग 4,207 मीटर है। सुनकर लग सकता है, “तो यह एवरेस्ट से तो काफी छोटा हुआ!” और समुद्र की सतह से नापने पर यह बात सही है। लेकिन मौना केआ का बड़ा हिस्सा पानी के नीचे है। उसकी ढलानें समुद्र की सतह के नीचे लगभग 6,000 मीटर तक जाती हैं। सोचिए, ऊपर बर्फीला या ठंडा शिखर, और नीचे अँधेरे नीले पानी में फैली चट्टानी देह! पूरा पहाड़ एक बहुत बड़े आइसक्रीम कोन जैसा है, जिसका निचला हिस्सा पानी में छिपा है। अब हम उस छिपे हिस्से की ओर उतरते हैं।

2:31समुद्र तल की यात्रा

हमारी कल्पना की पनडुब्बी अब समुद्र की सतह से नीचे जा रही है। ऊपर की चमक धीरे-धीरे धुंधली होती है, और नीचे गहरी नीली दुनिया फैलती जाती है। असली समुद्र तल लगभग सपाट फर्श जैसा नहीं होता। वहाँ पहाड़ियाँ, घाटियाँ, चट्टानें और महीन मिट्टी होती है। मौना केआ की विशाल ढलान इसी समुद्री तल के पास से ऊपर उठती है। जब वैज्ञानिक इसकी ऊँचाई नापते हैं, तो वे शिखर से उस गहरे आधार तक की दूरी का अनुमान लगाते हैं। कुछ जगहों पर ज्वालामुखी का भार समुद्र तल को नीचे भी दबा देता है। यानी पहाड़ ने अपने नीचे की धरती पर भी अपना निशान छोड़ दिया है! अब हमारे पास ऊँचाई का नीचे वाला टुकड़ा है। ऊपर वाला टुकड़ा जोड़ते ही असली संख्या सामने आएगी।

3:21असली जोड़ का कमाल

अब गणित का मजेदार समय! मौना केआ का ऊपर दिखाई देने वाला हिस्सा लगभग 4,207 मीटर है। समुद्र की सतह से नीचे फैला हिस्सा करीब 6,000 मीटर माना जाता है। दोनों को जोड़िए: 4,207 जमा 6,000, यानी लगभग 10,207 मीटर। अलग-अलग मापों और आधार की परिभाषा के कारण संख्या थोड़ी बदल सकती है, इसलिए वैज्ञानिक अक्सर इसे लगभग 10,200 मीटर कहते हैं। यह समुद्र की सतह से मौना केआ की ऊँचाई नहीं है। यह उसके गहरे समुद्री आधार से शिखर तक की कुल ऊँचाई है। अब तुलना साफ है: मौना केआ लगभग 10.2 किलोमीटर, और एवरेस्ट लगभग 8.849 किलोमीटर। वाह! हमारा पानी के नीचे छिपा पहाड़ लगभग 1.3 किलोमीटर लंबी बढ़त ले गया। लेकिन क्या इसका मतलब मौना केआ हर तरीके से सबसे ऊँचा है? बिल्कुल नहीं—मापने का नियम फिर महत्वपूर्ण हो जाता है।

4:26दो माप दो जवाब

अब एक आसान तुलना करते हैं। मान लीजिए दो पेड़ हैं। एक पेड़ ऊँची पहाड़ी पर खड़ा है, इसलिए जमीन से उसकी चोटी तक दूरी बड़ी दिखती है। दूसरा पेड़ समुद्र तल के नीचे एक गहरी ढलान से शुरू होता है, लेकिन उसका कुछ हिस्सा पानी छिपा देता है। अगर आप दोनों को एक ही जमीन से नापेंगे, तो जवाब अलग होगा। एवरेस्ट समुद्र की सतह से दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है। मौना केआ समुद्र तल से उसकी चोटी तक नापने पर छोटा है, पर अपने असली समुद्री आधार से शिखर तक नापने पर बड़ा है। इसलिए दोनों दावे अलग-अलग मापों में सही हो सकते हैं। विज्ञान में “सबसे बड़ा” कहने से पहले पूछना चाहिए: किस आधार से, किस दिशा में, और किस नियम से? अगला रहस्य बताएगा कि मौना केआ बना कैसे।

5:25लावा से बना पर्वत

मौना केआ एक ढाल ज्वालामुखी है। इसका मतलब है कि यह बहुत लंबे समय में बहते हुए लावा की परतों से बना, जो दूर-दूर तक फैलती गईं। ज्वालामुखी के मुँह से निकली गर्म, पिघली चट्टान ठंडी होकर ठोस बनती है। फिर अगली परत उसके ऊपर जमती है। ऐसा बार-बार हुआ, और धीरे-धीरे समुद्र के नीचे एक छोटा-सा उभार विशाल पर्वत में बदल गया। यह काम एक दिन या एक साल में नहीं हुआ—इसे बनने में लाखों साल लगे। मौना केआ की चौड़ी ढलान इसी धीमे निर्माण की कहानी सुनाती है। मजेदार बात यह है कि इसका आकार बहुत तीखी कील जैसा नहीं, बल्कि फैली हुई ढाल जैसा है। अब देखिए, इसकी चोटी पर इतनी खास दूरबीनें क्यों हैं।

6:15तारों वाली चोटी

मौना केआ की चोटी पर हवा अक्सर बहुत साफ और सूखी होती है। आसपास बड़े शहरों की चमकदार रोशनियाँ भी कम हैं। इसलिए वहाँ की दूरबीनों से वैज्ञानिक तारों, ग्रहों और दूर की आकाशगंगाओं का अध्ययन कर सकते हैं। दूरबीन कोई जादुई आँख नहीं, बल्कि बहुत बड़ी बाल्टी जैसी होती है, जो दूर से आती रोशनी को इकट्ठा करती है। चोटी की ऊँचाई बादलों के ऊपर तक पहुँच सकती है, जिससे आसमान को देखने में मदद मिलती है। सोचिए, जिस पहाड़ का आधा शरीर पानी में छिपा है, उसकी चोटी से लोग अंतरिक्ष की ओर देखते हैं! यहाँ धरती की गहराई और ब्रह्मांड की विशालता एक ही कहानी में मिल जाती है। लेकिन मौना केआ पर चढ़ाई की बात करने से पहले मौसम का एक ठंडा सरप्राइज जानना जरूरी है।

7:10गर्म द्वीप ठंडी चोटी

हवाई गर्म द्वीपों के लिए जाना जाता है, फिर भी मौना केआ की ऊँची चोटी पर बर्फ पड़ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ऊपर जाते-जाते हवा ठंडी होती जाती है। आम तौर पर हर एक किलोमीटर की ऊँचाई पर तापमान कई डिग्री घट सकता है। इसलिए समुद्र किनारे धूप हो, और चोटी पर सफेद बर्फ दिखाई दे—यह बिल्कुल संभव है। पहाड़ का ऊपर वाला छोटा हिस्सा मौसम की एक अलग दुनिया जैसा बन जाता है। वहाँ हवा तेज हो सकती है और ऑक्सीजन भी समुद्र तल की तुलना में कम होती है। इसी कारण वास्तविक यात्रा हमेशा प्रशिक्षित बड़ों, स्थानीय नियमों और सुरक्षित योजना के साथ ही होनी चाहिए। हम अपने वीडियो में सिर्फ कल्पना की सुरक्षित यात्रा करेंगे। अब जानें कि वैज्ञानिक समुद्र के नीचे छिपे हिस्से को मापते कैसे हैं।

8:07सोनार का जादू

समुद्र के नीचे पहाड़ों को देखने के लिए वैज्ञानिक कई उपकरणों का उपयोग करते हैं। एक तरीका है सोनार। इसमें जहाज से ध्वनि की तरंगें पानी में भेजी जाती हैं। वे समुद्र तल से टकराकर वापस आती हैं। वापस आने में लगे समय से वैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि नीचे की दूरी कितनी है। इसे ऐसे समझिए जैसे अँधेरे कमरे में आवाज लगाकर दीवार का पता लगाना, बस यहाँ आवाज पानी के अंदर यात्रा करती है। जहाज अलग-अलग जगहों पर माप लेते हैं और कंप्यूटर उन बिंदुओं को जोड़कर समुद्र तल का नक्शा बनाता है। इस तरह हमें मौना केआ की छिपी ढलान दिखाई देने लगती है। लेकिन सिर्फ नक्शा ही नहीं—चट्टानों के नमूने भी बताते हैं कि पहाड़ की कहानी कितनी पुरानी है।

8:55चट्टानों की किताब

चट्टानों को ध्यान से देखने पर वैज्ञानिक समझ सकते हैं कि वे लावा से बनी हैं या किसी दूसरी प्रक्रिया से। अलग-अलग परतें पहाड़ के बढ़ने का क्रम बताती हैं, जैसे किसी किताब के पन्ने। नीचे की पुरानी परतें पहले बनीं, और ऊपर की नई परतें बाद में जमा हुईं। कुछ चट्टानों में छोटे-छोटे खनिज भी होते हैं, जो बताते हैं कि वे कभी बहुत गर्म थे। मौना केआ का जन्म धरती के अंदर की गर्म गतिविधियों से हुआ, लेकिन आज इसका शिखर शांत दिखाई देता है। यह हमें सिखाता है कि पृथ्वी हमेशा बदलती रहती है—कभी धीरे, कभी तेज। और पहाड़ों की कहानी केवल उनकी ऊँचाई नहीं, उनके बनने का समय भी है। अब हम एक और प्रसिद्ध पहाड़ से सही तुलना करेंगे।

9:42एवरेस्ट की ऊँचाई

माउंट एवरेस्ट हिमालय पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है और समुद्र की औसत सतह से दुनिया का सबसे ऊँचा शिखर है। इसकी ऊँचाई लगभग 8,849 मीटर मानी जाती है। एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचने के लिए पर्वतारोहियों को बर्फ, पतली हवा और बहुत ठंडे मौसम जैसी कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। यहाँ एक जरूरी बात है: एवरेस्ट का आधार भी एकदम सीधी, सपाट रेखा नहीं है। इसलिए “आधार से शिखर” की माप में वैज्ञानिकों को तय करना पड़ता है कि किस आधार को चुना जाए। फिर भी सामान्य तुलना में मौना केआ का समुद्री तल से शिखर तक माप लगभग 10,200 मीटर और एवरेस्ट का समुद्र तल से माप 8,849 मीटर है। अब समझते हैं कि पहाड़ों की प्रतियोगिता क्यों आसान नहीं।

10:39सबसे ऊँचा किस अर्थ में

अगर सवाल हो, “समुद्र तल से सबसे ऊँचा शिखर कौन-सा है?” तो जवाब है एवरेस्ट। अगर सवाल हो, “अपने आसपास के समुद्री आधार से शिखर तक सबसे ऊँचा कौन?” तो मौना केआ बहुत मजबूत दावेदार है और आम तौर पर इसी उदाहरण को सबसे प्रसिद्ध माना जाता है। और अगर सवाल हो, “धरती के केंद्र से सबसे दूर कौन-सा पर्वत शिखर है?” तो धरती के गोल आकार और भूमध्य रेखा के उभार के कारण चिम्बोराज़ो का नाम आता है। देखिए, एक ही “सबसे ऊँचा” सवाल के कई अर्थ हो सकते हैं। इसलिए वैज्ञानिक तुलना में नियम साफ लिखते हैं। यह बिल्कुल खेल की तरह है: अगर खेल का मैदान और अंक गिनने का तरीका न बताया जाए, तो विजेता चुनना मुश्किल होगा। अब इस पूरे रहस्य को एक सरल चित्र में समेटते हैं।

11:34एक चित्र में पूरा सच

हम एक लंबा ऊर्ध्वाधर चित्र बनाते हैं। सबसे नीचे समुद्र तल है, उससे भी नीचे मौना केआ का असली आधार। वहाँ से ऊपर जाती पूरी रेखा लगभग 10.2 किलोमीटर की है। समुद्र की सतह तक पहुँचने में करीब 6 किलोमीटर लगते हैं, और वहाँ से शिखर तक लगभग 4.2 किलोमीटर। अब बगल में एवरेस्ट की रेखा बनाइए, जो समुद्र तल से लगभग 8.849 किलोमीटर ऊपर जाती है। चित्र में मौना केआ की कुल रेखा लंबी दिखेगी, जबकि एवरेस्ट की समुद्र तल वाली रेखा ऊँची दिखेगी। यही छिपा हुआ खेल है: पानी ने मौना केआ की नींव को ढक रखा है, पर वह नींव गायब नहीं हुई। माप बदलते ही छिपा हुआ हिस्सा भी कहानी का हिस्सा बन जाता है। अब अंतिम सफर में तीन बड़े सबक याद करते हैं।

12:33तीन बड़े सबक

आज हमने सीखा कि मौना केआ समुद्र की सतह से लगभग 4,207 मीटर ऊँचा दिखाई देता है, लेकिन समुद्र के नीचे उसका आधार करीब 6,000 मीटर और फैला है। आधार से शिखर तक उसकी कुल ऊँचाई लगभग 10,200 मीटर बनती है, जो एवरेस्ट की 8,849 मीटर वाली समुद्र तल की ऊँचाई से अधिक है। हमने यह भी जाना कि मौना केआ लावा की परतों से बना ढाल ज्वालामुखी है, उसकी चोटी पर दूरबीनें हैं, और वहाँ बर्फ भी पड़ सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात: किसी भी “सबसे ऊँचे” दावे के साथ मापने का तरीका पूछना चाहिए। घर पर सुरक्षित मजेदार चुनौती यह है कि कागज पर समुद्र तल, मौना केआ का छिपा हिस्सा और शिखर बनाकर पैमाने से तुलना करें। फिर यह तथ्य परिवार को सुनाइए: कभी-कभी सबसे बड़ा रहस्य पानी के नीचे छिपा होता है! अगली खोज तक, जिज्ञासु रहिए और सवाल पूछते रहिए।

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