A23a: घूमता हुआ विशाल हिमखंड कैसे बना तैरता द्वीप?
सारांश
A23a पृथ्वी के सबसे बड़े हिमखंडों में से एक है। जानिए कैसे यह घूमता है, समुद्री धाराओं में यात्रा करता है और समुद्री जीवों के लिए एक छोटा-सा चलता-फिरता घर बन जाता है।
पूरा पाठ
0:00विशाल बर्फीला रहस्य
क्या तुम कल्पना कर सकते हो कि बर्फ का एक टुकड़ा लगभग चार हजार वर्ग किलोमीटर चौड़ा हो—इतना बड़ा कि उसके सामने एक शहर भी छोटा लगे? यह कोई बर्फ की साधारण चादर नहीं, बल्कि A23a नाम का विशाल हिमखंड है, जो समुद्र में तैरता हुआ अपना सफर कर रहा है। यह घूम सकता है, समुद्र की धाराओं के साथ बह सकता है और कभी-कभी एक ही जगह पर अटक भी सकता है। सबसे मजेदार बात? इसके आसपास छोटे-छोटे जीवों का चलता-फिरता पड़ोस बन जाता है। आज तुम A23a की अद्भुत यात्रा के कप्तान हो। हम जानेंगे कि यह बना कैसे, चलता कैसे और रुकता क्यों है। अपना काल्पनिक दूरबीन तैयार रखो, क्योंकि हमारी यात्रा दक्षिणी ध्रुव के पास शुरू होने वाली है। लेकिन पहले देखते हैं कि इतना बड़ा हिमखंड पैदा कहाँ हुआ था।
0:54जन्म अंटार्कटिका में
A23a का जन्म अंटार्कटिका की एक बहुत बड़ी तैरती बर्फीली चादर, जिसे फिल्चनर-रोन बर्फीली पट्टी कहते हैं, से हुआ। साल 1986 में उसका एक विशाल हिस्सा टूटकर अलग हुआ। इस घटना को वैज्ञानिक ‘कैल्विंग’ कहते हैं। सुनने में यह किसी बर्फीले केक का टुकड़ा काटने जैसा लगता है, है न? लेकिन यह टुकड़ा इतना बड़ा था कि कई वर्षों तक समुद्र के तल के पास उथले हिस्से में फँसा रहा। A23a का नाम भी एक पहचान-पत्र जैसा है। अक्षर और संख्या वैज्ञानिकों को बताते हैं कि यह अंटार्कटिका के किस क्षेत्र से आया और किस क्रम में दर्ज हुआ। इसका ऊपरी हिस्सा सफेद दिखाई देता है, पर नीचे बर्फ की गहराई सैकड़ों मीटर हो सकती है। यानी जो भाग तुम देख रहे हो, वह पूरी कहानी का बस थोड़ा-सा हिस्सा है। अब सवाल है: इतनी भारी बर्फ तैरती कैसे है?
1:58तैरने का विज्ञान
इसका उत्तर है—पानी का कमाल। ठोस बर्फ, तरल पानी से थोड़ी कम घनी होती है। इसलिए बर्फ का बड़ा हिस्सा पानी के नीचे रहकर भी ऊपर तैरता है। इसे ऐसे सोचो: बर्फ का छोटा-सा टुकड़ा गिलास में डालो और उसका कुछ भाग ऊपर दिखाई देगा। A23a के साथ भी यही नियम काम करता है, बस उसका गिलास पूरा समुद्र है! आम तौर पर हिमखंड का लगभग एक-दसवाँ भाग पानी के ऊपर दिखता है और बाकी हिस्सा नीचे छिपा रहता है। A23a की मोटाई कई सौ मीटर तक हो सकती है, इसलिए नीचे का भाग समुद्र के तल के पास पहुँच सकता है। वैज्ञानिक उपग्रहों, जहाजों और रडार से इसकी ऊँचाई, चौड़ाई और गति मापते हैं। कभी-कभी बादल छाए हों, तब भी उपग्रह उसकी चमकीली आकृति पहचान लेते हैं। लेकिन पानी पर तैरना और आगे बढ़ना एक ही बात नहीं है। अब देखते हैं, इसे धक्का कौन देता है।
3:02समुद्र की अदृश्य सड़कें
समुद्र में A23a को आगे बढ़ाने वाली कई शक्तियाँ हैं। समुद्री धाराएँ पानी की बड़ी-बड़ी नदियों जैसी होती हैं, जो समुद्र के अंदर बहती रहती हैं। हवा भी उसकी ऊपर की सतह को धक्का देती है। लहरें उसे हिलाती हैं, जबकि ज्वार-भाटा पानी का स्तर ऊपर-नीचे करता है। इन सबका असर मिलकर हिमखंड की दिशा बदल सकता है। A23a बहुत भारी है, इसलिए वह तेज नाव की तरह दौड़ता नहीं। वह धीरे-धीरे खिसकता है—कभी कुछ किलोमीटर, कभी उससे भी कम। वैज्ञानिक उसकी यात्रा को नक्शे पर बिंदुओं से दिखाते हैं। कई बिंदु मिलकर एक लंबी रेखा बनाते हैं, जैसे किसी विशाल पेंसिल ने समुद्र पर रास्ता बनाया हो। कभी-कभी उसका रास्ता सीधा नहीं होता। वह मुड़ सकता है, घूम सकता है या गोल-गोल चक्कर लगा सकता है। लेकिन वह ऐसा क्यों करता है? इसके पीछे समुद्र का एक छिपा हुआ खेल है।
4:02हिमखंड का नृत्य
अब आता है A23a का सबसे मजेदार हुनर—घूमना! जब हिमखंड की एक तरफ पानी का बहाव दूसरी तरफ से थोड़ा अलग होता है, तो उस पर घूमने वाला बल लग सकता है। इसे तुम दरवाजे को उसके किनारे से धकेलने जैसा समझो। अगर धक्का बीच में लगे, दरवाजा आगे जाएगा। अगर धक्का किनारे पर लगे, वह घूमेगा। A23a का आकार असमान है, इसलिए समुद्र उसे अलग-अलग जगहों से धकेलता है। कभी उसका एक कोना पानी में ज्यादा नीचे होता है, कभी दूसरा। इससे हिमखंड धीरे-धीरे घुमने लगता है। वैज्ञानिकों ने A23a को एक जगह पर घूमते हुए देखा है। वह जैसे समुद्र पर अपना बड़ा-सा बर्फीला नृत्य कर रहा हो—बिना संगीत के, लेकिन बहुत धैर्य के साथ! इस घूमने से आसपास का पानी भी हलचल करता है। अब सोचो, अगर घूमता हुआ हिमखंड अचानक समुद्र के तल को छू ले तो क्या होगा?
5:03समुद्र तल की पकड़
अगर A23a का नीचे वाला हिस्सा समुद्र के तल से टकराकर टिक जाए, तो वह ‘ग्राउंडेड’ यानी तल में अटका हुआ कहलाता है। यही उसके साथ लंबे समय तक हुआ। ऊपर से वह विशाल तैरता द्वीप दिखता था, लेकिन नीचे उसका बर्फीला आधार समुद्र की जमीन को छू रहा था। समुद्र की धाराएँ उसे आगे खींचती रहीं, फिर भी वह अपनी जगह से आसानी से नहीं हिला। यह वैसा है जैसे खिलौना नाव पानी में हो, लेकिन उसका धागा नीचे किसी खूंटी से जुड़ा हो। समय के साथ समुद्र का स्तर, ज्वार-भाटा और बर्फ का धीरे-धीरे पिघलना उसकी स्थिति बदल सकते हैं। आखिरकार A23a फिर स्वतंत्र होकर बहने लगा। उसके सफर का यह ठहराव बहुत महत्वपूर्ण था, क्योंकि वैज्ञानिकों को एक ही जगह पर इतने बड़े हिमखंड को लंबे समय तक देखने का मौका मिला। अब वह किस दिशा में निकला?
6:07धाराओं की यात्रा
जब A23a समुद्र तल की पकड़ से छूटा, तो वह दक्षिणी महासागर की धाराओं के साथ आगे बढ़ने लगा। यह इलाका अंटार्कटिका के चारों ओर फैला ठंडा, शक्तिशाली समुद्र है। यहाँ हवाएँ तेज हो सकती हैं और लहरें बहुत दूर तक यात्रा कर सकती हैं। A23a का रास्ता समय के साथ बदलता रहा, क्योंकि समुद्री धाराएँ सीधी सड़क नहीं, बल्कि घुमावदार पटरियाँ हैं। वह कभी उत्तर की ओर खिसकता, कभी किसी चक्करदार बहाव में मुड़ जाता। वैज्ञानिक उसके स्थान को उपग्रह चित्रों से देखते हैं और पुराने चित्रों से मिलाकर उसकी गति समझते हैं। उपग्रह ऊपर से A23a को चमकती हुई सफेद आकृति की तरह दिखाते हैं, जबकि उसके किनारे टूटे हुए बर्फीले पहाड़ों जैसे दिखाई दे सकते हैं। इतना बड़ा हिमखंड भी समुद्र की ताकत के सामने धीरे-धीरे दिशा बदलता है। लेकिन उसके सफर में एक और अजीब मोड़ आने वाला था—एक ऐसा स्थान जहाँ पानी उसे गोल-गोल घुमा सकता है।
7:18गोल घूमता समुद्र
दक्षिणी महासागर में कुछ जगहों पर पानी एक बड़े घूमते हुए भँवर जैसा व्यवहार करता है। ऐसे क्षेत्र को वैज्ञानिक कभी-कभी ‘टेलर कॉलम’ कहते हैं। यह कोई जादुई अदृश्य दीवार नहीं, बल्कि समुद्र के बहाव और नीचे की चट्टानी आकृति से बना पानी का विशेष क्षेत्र है। जब A23a ऐसे बहाव के पास पहुँचा, तो उसकी गति धीमी हो गई और वह घूमते हुए एक जगह के आसपास रहने लगा। ऊपर से देखने पर ऐसा लग सकता है कि हिमखंड ने गोल नृत्य का अभ्यास शुरू कर दिया है। वास्तव में नीचे बहता पानी उसके चारों ओर रास्ता बनाता है, जबकि समुद्र का तल उसकी यात्रा को प्रभावित करता है। यह घटना वैज्ञानिकों के लिए बहुत उपयोगी है। वे जान सकते हैं कि बड़े हिमखंड पानी की गहराई और धाराओं के साथ कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। अब A23a सिर्फ यात्रा करने वाला हिमखंड नहीं रहा—वह एक तैरते हुए छोटे संसार जैसा बनने लगा।
8:27बर्फ के आसपास जीवन
A23a के ऊपर बर्फ है, लेकिन उसके आसपास का समुद्र जीवन से भरा हो सकता है। हिमखंड के किनारे पानी की हलचल बढ़ती है। यह हलचल समुद्र की अलग-अलग परतों के पानी को मिलाने में मदद कर सकती है। नीचे से ऊपर आने वाले पानी में छोटे पोषक पदार्थ हो सकते हैं। इन पोषक पदार्थों से सूक्ष्म पौधों जैसे फाइटोप्लैंकटन को बढ़ने में मदद मिलती है। फाइटोप्लैंकटन बहुत छोटे होते हैं, पर समुद्री भोजन-जाल की शुरुआत अक्सर यहीं से होती है। छोटे जीव इन्हें खाते हैं, फिर बड़े समुद्री जीव उन छोटे जीवों को खाते हैं। A23a खुद कोई जीवित द्वीप नहीं है, लेकिन उसके आसपास का पानी एक अस्थायी भोजन-क्षेत्र बन सकता है। बर्फ की छाया कुछ जगहों को ठंडा रखती है और किनारे पर दरारों में पानी जमा हो सकता है। इतने बड़े हिमखंड के साथ चलती यह जीवन-श्रृंखला सचमुच कमाल की है। लेकिन कौन-कौन से जीव इस चलते घर के पास आ सकते हैं?
9:35चलता फिरता पड़ोस
A23a की खड़ी बर्फीली दीवारों और नीचे लटकती बर्फ पर छोटे समुद्री जीव चिपक सकते हैं। सूक्ष्म शैवाल, छोटे क्रिल और दूसरे नन्हे जीव उसके आसपास के पानी में मिल सकते हैं। क्रिल छोटे झींगे जैसे दिखते हैं और समुद्री भोजन-श्रृंखला में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। जहाँ क्रिल होते हैं, वहाँ उन्हें खाने वाले समुद्री पक्षी, मछलियाँ और बड़े समुद्री जीव भी आ सकते हैं। कुछ पक्षी पानी की सतह पर आराम कर सकते हैं या आसपास भोजन खोज सकते हैं। सील जैसे जीव पास की तैरती बर्फ पर थोड़ी देर ठहर सकते हैं। याद रखो, A23a कोई स्थायी घर नहीं है। यह एक चलता-फिरता पड़ोस है, जिसका पता समुद्र के साथ बदलता रहता है। इसके किनारे पर जीवन कभी अधिक, कभी कम हो सकता है। मौसम, रोशनी, पानी का तापमान और पोषक पदार्थ सब फर्क डालते हैं। अब सोचो, यह विशाल बर्फीला द्वीप धीरे-धीरे छोटा कैसे होगा?
10:43धीरे होता बदलाव
हिमखंड हमेशा के लिए विशाल नहीं रहते। गर्म समुद्री पानी नीचे से उनकी बर्फ को धीरे-धीरे पिघला सकता है। ऊपर की सतह पर धूप और गर्म हवा भी असर डाल सकती है। लहरें किनारों को काटती हैं, जिससे छोटे टुकड़े अलग हो सकते हैं। इसे ‘कैल्विंग’ कहा जाता है, जैसे बड़े हिमखंड से छोटे बर्फीले टुकड़े टूटना। A23a का आकार घटेगा, लेकिन यह प्रक्रिया बहुत धीमी हो सकती है। इतने बड़े हिमखंड को छोटा होने में वर्षों लग सकते हैं। पिघली हुई बर्फ समुद्र में मीठा पानी छोड़ती है, और इससे आसपास के पानी का तापमान तथा नमक की मात्रा बदल सकती है। वैज्ञानिक इन बदलावों को मापते हैं, क्योंकि बड़े हिमखंड समुद्र के वातावरण को प्रभावित कर सकते हैं। आखिर में A23a छोटे-छोटे टुकड़ों में बँट सकता है और समुद्र में मिल सकता है। मगर उससे पहले उसकी यात्रा कई अद्भुत रास्तों से गुजर सकती है।
11:46वैज्ञानिकों की निगरानी
A23a जैसे हिमखंड वैज्ञानिकों के लिए प्राकृतिक प्रयोगशाला हैं। वे देखते हैं कि बर्फ, समुद्र, हवा और जीव-जगत एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं। उपग्रह रोज या कुछ दिनों के अंतर पर इसकी तस्वीरें ले सकते हैं। इन तस्वीरों से पता चलता है कि हिमखंड किस दिशा में जा रहा है और उसका आकार कितना बदल रहा है। वैज्ञानिक बर्फ के नमूने, पानी का तापमान और समुद्र की नमक मात्रा भी जाँच सकते हैं। कभी वे छोटे उपकरणों से धाराओं की गति मापते हैं। इन आँकड़ों को कंप्यूटर मॉडल में डालकर वे अनुमान लगाते हैं कि A23a आगे कहाँ जा सकता है। मॉडल कोई जादुई भविष्यवक्ता नहीं होता। वह पुराने और नए आँकड़ों से सबसे संभावित रास्ता समझने में मदद करता है। कुछ तस्वीरें ऊपर से होती हैं, कुछ समुद्र के अंदर से। मिलकर वे A23a की पूरी कहानी बताती हैं। लेकिन इस कहानी में सबसे बड़ा सबक क्या है?
12:48पृथ्वी का जुड़ाव
A23a हमें दिखाता है कि पृथ्वी की प्रणालियाँ अकेली-अकेली काम नहीं करतीं। बर्फ समुद्र पर तैरती है, समुद्र की धाराएँ उसे धकेलती हैं, हवा उसकी दिशा बदलती है और उसके आसपास का पानी छोटे जीवों को पोषक पदार्थ दे सकता है। एक हिमखंड का सफर दूर बैठे वैज्ञानिकों को मौसम, समुद्र और जीवन के रिश्ते समझने में मदद करता है। यह भी याद रखना जरूरी है कि हर बड़ा हिमखंड एक ही कारण से नहीं बनता। बर्फीली पट्टियों में प्राकृतिक टूटना होता रहता है। वैज्ञानिक लंबे समय के बदलावों को समझने के लिए बहुत सारे आँकड़े देखते हैं, सिर्फ एक घटना को नहीं। A23a की कहानी हमें ध्यान से देखने, सवाल पूछने और सबूतों से सीखने की आदत सिखाती है। पृथ्वी एक बहुत बड़ा, जुड़ा हुआ तंत्र है—और कभी-कभी उसका शिक्षक एक तैरता हुआ बर्फीला दानव बन जाता है। अब समय है हमारी यात्रा का अंतिम चक्कर लगाने का।
13:57यात्रा का पुनरावलोकन
तो चलो, A23a की कहानी जल्दी से दोहराते हैं। यह 1986 में अंटार्कटिका की विशाल बर्फीली पट्टी से अलग हुआ। अपने कम घनत्व के कारण यह समुद्र पर तैरता रहा, जबकि उसका अधिकतर भाग पानी के नीचे छिपा रहा। समुद्री धाराओं, हवा और लहरों ने इसे आगे बढ़ाया। लंबे समय तक इसका नीचे वाला हिस्सा समुद्र तल में अटका रहा। बाद में यह मुक्त हुआ और दक्षिणी महासागर में घूमता हुआ आगे बढ़ा। कुछ जगहों पर पानी और समुद्र तल की आकृति ने इसे गोल-गोल घुमाया। इसके आसपास पोषक पदार्थों से भरपूर पानी छोटे जीवों और समुद्री भोजन-श्रृंखला को सहारा दे सकता है। और धीरे-धीरे पिघलने तथा टूटने से इसका आकार बदलता रहेगा। सबसे शानदार बात यह है कि A23a सिर्फ बर्फ का टुकड़ा नहीं, बल्कि पृथ्वी के काम करने का एक चलता-फिरता उदाहरण है। घर पर सुरक्षित चुनौती लो: एक कटोरे में पानी और बर्फ का टुकड़ा रखकर देखो कि कितना भाग ऊपर रहता है। फिर परिवार को बताओ—A23a क्यों घूमता है! अगली जिज्ञासापूर्ण यात्रा तक, सवाल पूछते रहो और हमारी अद्भुत पृथ्वी को ध्यान से देखते रहो।
अन्य भाषाओं में
- English: A23a: The Giant Iceberg That Became a Floating Island
- संस्कृतम्: A23a: हिमखण्डः कथं चलद्वीपः अभवत्?
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शृंखला: science (हिन्दी)