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DIY लावा लैंप: तेल, पानी और बुलबुले का जादू!

2026-08-28 · YouTube पर देखें

सारांश

एक पारदर्शी बोतल को चमकते, उछलते लावा लैंप में बदलते हुए जानिए कि तेल और पानी अलग क्यों रहते हैं, रंग नीचे क्यों जाता है और कार्बन डाइऑक्साइड के बुलबुले ऊपर कैसे उठते हैं। यह आसान प्रयोग किसी बड़े की देखरेख में करें और घर पर सुरक्षित विज्ञान का मज़ा लें।

पूरा पाठ

0:00लावा लैंप का रहस्य

क्या तुम एक ऐसी बोतल बना सकते हो जिसमें चमकीले बुलबुले ऊपर जाएँ, फिर नीचे लौट आएँ, और यह सब बिना किसी असली लावे के हो? आज हम बनाएँगे अपना DIY लावा लैंप और पता लगाएँगे कि तेल, पानी और छोटी-सी फिज़ मिलकर इतना शानदार बुलबुला-नृत्य कैसे करते हैं। सबसे मज़ेदार बात यह है कि इसके पीछे छिपा विज्ञान तुम्हारी आँखों के सामने दिखाई देगा। बोतल के अंदर रंगीन गोले बनेंगे, ऊपर उठेंगे, रुकेंगे और फिर वापस नीचे आ जाएँगे। ऐसा लगेगा जैसे बोतल के अंदर कोई छोटा-सा विज्ञान शो चल रहा हो। लेकिन इस शो के लिए हमें सही सामान और एक सुरक्षित तैयारी चाहिए। तो पहले देखते हैं कि हमारी विज्ञान-टोली को क्या-क्या चाहिए।

0:50सामान और सुरक्षा

हमें चाहिए एक साफ़, पारदर्शी प्लास्टिक की बोतल, पानी, वनस्पति तेल, खाने का रंग और फिज़ वाली गोली का एक छोटा टुकड़ा। एक ट्रे या मेज़ पर काम करना अच्छा रहेगा, ताकि अगर कुछ बूँदें गिरें तो आसानी से साफ़ की जा सकें। और याद रखो, किसी बड़े की मदद ज़रूर लो। बोतल को कभी भी कसकर बंद करके फिज़ वाली गोली मत डालना, क्योंकि अंदर गैस बन सकती है और दबाव बढ़ सकता है। प्रयोग की चीज़ों को चखना भी नहीं है। ये देखने और सीखने के लिए हैं, खाने के लिए नहीं। रंग चुनते समय लाल, नीला या हरा रंग बहुत सुंदर दिख सकता है, लेकिन किसी भी सुरक्षित खाद्य रंग की थोड़ी-सी मात्रा चलेगी। अब सामान तैयार है। अगला सवाल है: बोतल में पहले पानी जाएगा या तेल?

1:48रंगीन पानी तैयार

अब बोतल में लगभग एक-चौथाई हिस्सा पानी भरो। बिल्कुल ऊपर तक नहीं, क्योंकि बाद में तेल और बुलबुलों के लिए जगह चाहिए। पानी में खाने के रंग की कुछ बूँदें डालो। एक या दो बूँदें काफी हैं। धीरे से बोतल को घुमाओ, ताकि रंग पानी में फैल जाए। देखो, पानी जल्दी रंगीन हो गया! ऐसा इसलिए क्योंकि खाने का रंग पानी में घुल जाता है। घुलने का मतलब है कि रंग के बहुत छोटे कण पानी के बीच फैल जाते हैं और अलग परत दिखाई नहीं देते। पानी का रंग बदल गया, लेकिन पानी पानी ही रहा। अब हमें उसके ऊपर तेल डालना है। तेल डालते समय बोतल को थोड़ा झुकाकर धीरे-धीरे डालो, ताकि झाग बहुत कम बने। ध्यान से देखना, क्योंकि अगला दृश्य दो अलग दुनियाओं जैसा लगेगा।

2:41तेल पानी से अलग

अब बोतल को लगभग तीन-चौथाई तक वनस्पति तेल से भर दो। ऊपर थोड़ी खाली जगह छोड़ना ज़रूरी है। वाह! तेल ऊपर है और रंगीन पानी नीचे। दोनों एक-दूसरे में मिल नहीं रहे। क्या तेल पानी से नाराज़ है? नहीं, बस दोनों की बनावट अलग है। पानी के कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं और तेल के कण अपने समूह में रहना पसंद करते हैं। इसलिए वे अलग परतें बनाते हैं। एक और मज़ेदार कारण है घनत्व। घनत्व बताता है कि किसी चीज़ की थोड़ी-सी मात्रा में कितना पदार्थ भरा है। पानी तेल से अधिक घना है, इसलिए पानी नीचे बैठता है और हल्का तेल ऊपर तैरता है। यह बोतल अब शांत दिख रही है, लेकिन अंदर एक बड़ी तैयारी चल रही है। अब देखते हैं कि रंगीन पानी तेल के बीच से नीचे क्यों चला जाता है।

3:39रंग का नीचे जाना

खाने का रंग पानी में घुलता है, तेल में नहीं। इसलिए जब रंग की बूँद तेल के ऊपरी हिस्से में पहुँचती है, वह तेल में फैलती नहीं रहती। वह भारी रंगीन पानी की छोटी बूँद बनाकर नीचे की पानी वाली परत में चली जाती है। इसे ऐसे समझो: तेल एक फिसलन भरी सीढ़ी है और रंगीन पानी नीचे अपने घर लौट रहा है। अभी बोतल में रंग नीचे जमा है, क्योंकि कोई गैस उसे ऊपर धकेल नहीं रही। इस बात को याद रखो: रंग खुद से उड़ नहीं रहा; उसे ऊपर ले जाने के लिए कुछ हल्का चाहिए। हमारी फिज़ वाली गोली यही काम शुरू करेगी। लेकिन वह गोली पानी में पहुँचकर करती क्या है? इसका जवाब छोटे-छोटे बुलबुलों में छिपा है।

4:29फिज़ का जादू

अब फिज़ वाली गोली का छोटा टुकड़ा लो और उसे बोतल में डालो। बोतल को बंद मत करना। जैसे ही गोली पानी की परत तक पहुँचेगी, वह घुलने लगेगी और फिज़ की आवाज़ के साथ बुलबुले बनाएगी। गोली में ऐसे पदार्थ होते हैं जो पानी में मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड वही गैस है जो सोडा जैसे पेय में छोटे बुलबुले बनाती है, लेकिन यहाँ हम केवल उसका विज्ञान देख रहे हैं। गोली के घुलते ही गैस पानी के अंदर बहुत-से छोटे बुलबुलों में बदल जाती है। अब असली लावा-लैंप वाला क्षण आने वाला है। आँखें बोतल पर रखो, क्योंकि ऊपर उठने की यात्रा अभी शुरू होती है।

5:16बुलबुले ऊपर उठे

देखो! रंगीन पानी के छोटे गोले ऊपर उठ रहे हैं। इसका कारण बहुत सुंदर है। रंगीन पानी की बूँद अपने साथ कार्बन डाइऑक्साइड के बुलबुले पकड़ लेती है। अब उस बूँद और गैस का मिला-जुला समूह आसपास के तेल से हल्का हो जाता है। घनत्व कम हुआ, तो वह ऊपर की ओर तैरने लगा। इसे ऐसे सोचो: एक भारी बैग अकेला नीचे बैठता है, लेकिन अगर उसके साथ बहुत-से हल्के गुब्बारे बाँध दो, तो पूरा समूह ऊपर उठ सकता है। यहाँ गैस के बुलबुले छोटे गुब्बारों जैसा काम करते हैं। ऊपर पहुँचकर बूँद तेल की सतह के पास आती है। अब अनुमान लगाओ—क्या वह वहीं हमेशा तैरती रहेगी, या फिर उसका सफर नीचे लौटेगा?

6:03बूँदों की वापसी

ऊपर पहुँचते ही रंगीन बूँद से गैस के बुलबुले अलग हो जाते हैं। फुस्स! गैस तेल में नहीं टिकती और ऊपर की खाली जगह में चली जाती है। अब रंगीन पानी की बूँद फिर से भारी हो जाती है। उसका घनत्व बढ़ जाता है, इसलिए वह वापस नीचे पानी वाली परत में डूब जाती है। नीचे पहुँचते ही उसे फिर नए कार्बन डाइऑक्साइड बुलबुले मिल सकते हैं, और वह फिर ऊपर उठ सकती है। यही ऊपर-नीचे की यात्रा हमारे लावा लैंप को जीवित-सा दिखाती है। असल में बोतल में कोई जादुई जीव नहीं है—सिर्फ घनत्व, गैस और द्रवों का शानदार खेल है। लेकिन क्या होगा अगर हम बोतल को बहुत ज़ोर से हिलाएँ? अगली बार हम इसे आज़माने से पहले उसका सही तरीका जानेंगे।

6:54धीरे और सुरक्षित

बोतल को ज़ोर से हिलाना नहीं है। ऐसा करने पर तेल और पानी थोड़ी देर के लिए छोटे-छोटे टुकड़ों में मिलते-जुलते दिख सकते हैं। इसे मिश्रण कहते हैं। फिर भी वे सचमुच एक नहीं बनते; कुछ समय बाद दोबारा अलग परतें बन जाती हैं। अगर तुम हल्का-सा घुमाओ, तो रंग की गति सुंदर लग सकती है, लेकिन असली बुलबुला-नृत्य फिज़ वाली गोली से ही आता है। अगर बुलबुले बहुत तेज़ हों, तो अगली बार गोली का और छोटा टुकड़ा इस्तेमाल करो। अगर कुछ नहीं हो रहा, तो देखो कि गोली पानी तक पहुँची या नहीं। याद रखो, तेल और पानी की परतें फिर से शांत होने में थोड़ा समय ले सकती हैं। अब हमारे पास एक चलती हुई प्रयोगशाला है। लेकिन क्या रंग बदलने पर लैंप का नज़ारा भी बदलता है?

7:50रंगों का विज्ञान

चलो अब रंगों का विज्ञान देखते हैं। लाल रंग की बूँदें चमकीली और गर्म दिखाई दे सकती हैं। नीला रंग शांत समुद्र जैसा लगता है। पीला रंग धूप की छोटी किरण जैसा चमक सकता है। रंग बदलने से घनत्व का नियम नहीं बदलता। रंग सिर्फ यह आसान बनाता है कि हम पानी की बूँदों और उनके सफर को साफ़-साफ़ देख सकें। तुम दो अलग खाद्य रंगों की बहुत थोड़ी मात्रा पानी में मिलाकर नया रंग भी बना सकते हो, लेकिन हर बार केवल सुरक्षित खाद्य रंग और कम मात्रा इस्तेमाल करो। याद रखो, रंग तेल में घुलने के बजाय पानी के साथ यात्रा करता है। यह एक बड़ा सुराग है कि कौन-सी चीज़ किसमें घुलती है। अब ज़रा सोचो, अगर हम रोशनी पीछे से रखें तो बुलबुले कैसे दिखेंगे?

8:41रोशनी का कमाल

अब किसी बड़े की मदद से बोतल के पीछे एक छोटी टॉर्च या सुरक्षित रोशनी रख सकते हो। रोशनी को बोतल के अंदर डालना नहीं है और गर्म बल्ब का इस्तेमाल नहीं करना है। पीछे से आती रोशनी रंगीन बूँदों की किनारियाँ चमका सकती है। वाह, हमारा साधारण प्रयोग अब चमकता हुआ कला-चित्र जैसा लग रहा है! ध्यान दो, रोशनी बुलबुलों को ऊपर नहीं उठाती। ऊपर-नीचे की असली वजह अब भी कार्बन डाइऑक्साइड और घनत्व है। रोशनी सिर्फ दृश्य को आसानी से देखने में मदद करती है। यह भी याद रखो कि असली लावा बहुत गर्म होता है, लेकिन हमारी बोतल वाला लावा केवल रंगीन पानी है और इसे छूने की ज़रूरत नहीं। अब हम एक छोटा वैज्ञानिक अनुमान लगाएंगे और जाँचेंगे कि गोली के आकार से क्या बदलता है।

9:23छोटा वैज्ञानिक परीक्षण

वैज्ञानिक बनने का एक तरीका है: पहले अनुमान लगाओ, फिर ध्यान से देखो। अनुमान लगाओ कि फिज़ वाली गोली का बड़ा टुकड़ा डालने पर क्या होगा। शायद ज़्यादा गैस जल्दी बने और बुलबुले तेज़ी से उठें। छोटे टुकड़े से शायद गति धीमी हो और लावा लैंप अधिक देर तक चलता दिखे। इसे जाँचने के लिए पहले प्रयोग को शांत होने दो। फिर किसी बड़े की मदद से नया पानी और तेल लेकर दूसरी बोतल में एक छोटा टुकड़ा आज़माओ। दोनों बोतलों को एक साथ देखकर तुलना करो। कौन-सी बोतल में बुलबुले तेज़ हैं? कौन-सी में वे देर तक आते हैं? बस एक समय में एक ही चीज़ बदलो, तभी तुलना सही होगी। इसे निष्पक्ष जाँच कहते हैं। अब अंतिम विज्ञान-पहेली: फिज़ खत्म होने के बाद लैंप क्यों रुक जाता है?

10:18फिज़ का अंत

फिज़ वाली गोली में मौजूद घुलने वाले पदार्थ जब पानी में प्रतिक्रिया करते हैं, तब कार्बन डाइऑक्साइड बनती है। कुछ देर बाद गोली का ज़्यादातर हिस्सा घुल जाता है और गैस बनना कम हो जाता है। गैस के नए बुलबुले नहीं होंगे, तो रंगीन पानी की बूँदों को ऊपर उठाने वाला हल्का सहारा भी नहीं मिलेगा। इसलिए बूँदें नीचे रह जाती हैं और लैंप शांत हो जाता है। यह बिल्कुल ठीक है। प्रयोग खत्म होने का मतलब है कि हमने एक प्रक्रिया देख ली। अगर दोबारा करना हो, तो बोतल को खाली करके साफ़ करो और किसी बड़े की मदद से नया प्रयोग शुरू करो। पुरानी फिज़ वाली गोली को फिर से इस्तेमाल करने की कोशिश मत करो। अब चलो पूरे सफर को एक छोटी कहानी की तरह जोड़ते हैं।

11:10पाँच बड़े सबक

पहला, पानी तेल से अधिक घना है, इसलिए पानी नीचे और तेल ऊपर रहता है। दूसरा, खाने का रंग पानी में घुलता है, तेल में नहीं, इसलिए रंगीन बूँदें पानी तक पहुँचती हैं। तीसरा, फिज़ वाली गोली पानी में घुलकर कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाती है। चौथा, गैस के बुलबुले रंगीन पानी की बूँदों को तेल से हल्का बना देते हैं, इसलिए वे ऊपर उठती हैं। पाँचवाँ, ऊपर पहुँचकर बुलबुले छूट जाते हैं और बूँदें फिर भारी होकर नीचे लौटती हैं। यही है हमारा ऊपर-नीचे चलता लावा लैंप। इस पूरे प्रयोग में हमने घनत्व, घुलना और गैस—तीन बड़े विज्ञान विचार एक ही बोतल में देखे। लेकिन विज्ञान की सबसे अच्छी बात यह है कि देखने के बाद हम नए सवाल भी बना सकते हैं।

12:05घर की विज्ञान चुनौती

अब तुम्हारी सुरक्षित विज्ञान-चुनौती है: किसी बड़े की मदद से सोचो कि अगर पानी की जगह कोई अलग सुरक्षित, रंगीन पानी वाला तरल लिया जाए, तो क्या परिणाम बदल सकता है। प्रयोग करने से पहले अनुमान लिखो, और बाद में जो देखा उसे लिखो। बोतल को बंद मत करना, चीज़ों को चखना मत, और हर बार ट्रे पर काम करना। तुम यह भी गिन सकते हो कि एक रंगीन बूँद ऊपर जाकर वापस नीचे आने में कितने सेकंड लेती है। क्या बड़े टुकड़े से समय बदलेगा? क्या छोटे टुकड़े से बुलबुले ज़्यादा देर चलेंगे? याद रखो, घर के प्रयोग में हमेशा किसी बड़े को साथ रखो और केवल बताए गए सुरक्षित सामान का इस्तेमाल करो। अब आखिरी बार हमारे चमकते बुलबुलों को देखते हैं और एक मज़ेदार तथ्य सुनते हैं।

12:57विज्ञान का चमकता निष्कर्ष

आज तुमने एक बोतल में छोटा-सा ब्रह्मांड बना दिया। पानी अधिक घना होने के कारण नीचे रहा, तेल हल्का होने के कारण ऊपर तैरा, और रंग पानी में घुलकर साफ़ दिखाई दिया। फिज़ वाली गोली ने कार्बन डाइऑक्साइड के बुलबुले बनाए। उन बुलबुलों ने रंगीन पानी को ऊपर पहुँचाया, फिर बुलबुले छूटे और बूँदें नीचे लौट आईं। याद रखने लायक मज़ेदार तथ्य यह है कि कार्बन डाइऑक्साइड हमारे साँस छोड़ने वाली हवा में भी होती है, लेकिन इस प्रयोग में हम उसे गोली की प्रतिक्रिया से बनते हुए देख रहे हैं। तुमने घनत्व को केवल किताब में नहीं पढ़ा—तुमने उसे नाचते हुए देखा! अब किसी बड़े को अपना लावा लैंप दिखाओ और उन्हें समझाओ कि कौन-सी चीज़ ऊपर गई, कौन-सी नीचे रही और बुलबुले ने क्या काम किया। सुरक्षित रहो, सवाल पूछते रहो और अपने आसपास के विज्ञान को ध्यान से देखो। अगली बार जब कोई बुलबुला ऊपर उठे, तो याद रखना—उसके अंदर विज्ञान की पूरी कहानी छिपी हो सकती है।

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शृंखला: science (हिन्दी)